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Showing posts from September, 2017

School v/s College

1.  स्कूल में फर्स्ट आने की होड लगी रहती है। 98% लाने वाला बच्चा भी घर रोते हुए जाता है यह कहकर की मेरे 99% नही आये ।  पर कॉलेज में आते ही लगता है कि किसी तरह बस पास हो जाएँ। 33% आने की खुशी सिर्फ कॉलेज वाले ही समझ सकते हैं । इतने नंबर आने पे तो कॉलेज में पार्टी का माहौल बन जाता है । 2. स्कूल में जो फर्स्ट आता था सब उसे जानते थे पर कॉलेज में जो सबसे ज्यादा नंबर लाता था वो भी किसी को अपना चेहरा 2 महीने तक नही दिखाता क्योंकि वो भी खुद 62% लेकर फर्स्ट आया होता  है । 3. स्कूल में पढ़ाई में ध्यान लगता है पर कॉलेज में आते ही पढ़ाई की जगह लड़कियाँ ले लेती हैं । अब पढ़ाई में काम और सुंदर कन्याओं में ध्यान ज़्यादा लगने लगता है । 4. स्कूल में अगले दिन टीचर के लेसन पढ़ाने से पहले ही बच्चे सारा लेसन पढ़ के आ जाते थे । पर कॉलेज में एग्जाम के दिन तक हमे यह पता नही चल पाता कि एग्जाम कौन से सब्जेस्ट का है । 5. स्कूल में जाते समय स्कूल बैग एकदम नया और किताबों से भरा होता था पर कॉलेज में बैग किस चिड़िया का नाम है पता ही नही चलता । अगर किसी के पास दिख भी जाये तो उसे किताबों को छोड़कर सब मिल जा...

फोकट का ज्ञान!

छत मे अपने पौधों को पानी दे रहा था तो पड़ोसी ने कहा पानी क्यों दे रहे हो वैसे भी आज बारिश होने वाली है , ऐसा सुन कर लगा कि उसे क्या जरूरत है बोलने की। मेरे पौधे , मेरा मन । मैं कुछ भी करूं उसे क्या मतलब। लोगों को तो बस फालतू का ज्ञान झाड़ना होता है। ऐसा विचार कईं बार आपके मन भी आया होगा कि लोगों को हमारे निजी जिंदगी से क्या मतलब ।हम कुछ भी करे लोग अपने विचार जरूर देते हैं चाहे हमे वो विचार अच्छे लगें या नही । जब हम चाहते ही नही  कि कोई हमारे काम के बीच मे अपनी राय दे। पर लोगों द्वारा दिये जाने वाले येह फालतू के विचारों का भी हमारे जीवन मे बहुत महत्व होता है । चाहे उस समय वो विचार आपको अच्छे न लगें पर यह विचार भविष्य में कहीं न कहीं हमारा साथ जरूर देते है बस आपको जरूरत है उन बातों को ध्यान में रखना । कई बार मेरे साथ भी ये सब हुआ है । मुझे भी बुरा लगता है कि लोग हमारे काम मे टांग यूँ अड़ाते है । पर बाद में जब वही बात मेरे काम आती थी तो लगता था कि हाँ उस दिन उस व्यक्ति ने सही कहा था । तब उस व्यक्ति के प्रति हमारा सम्मान बढ़ जाता है। हम उनकी बातों को ध्यान से सुनने लगते हैं । मेरे हि...

असली मज़ा तो इसमें है ।

1. सर्दी में नाक रुमाल से न पोछकर स्वेटर की बाजू से पोछने का मजा ही कुछ और होता है ।🤓 2.  सिगरेट पीने के बाद सेन्टर फ्रेश के बदले प्याज़ खाने के मजे ही कुछ और है ।😎 3.  कोई सुन न ले इसलिए सोफे में अपनी तशरीफ़ दबाकर वायु प्रवाह करने का मजा ही कुछ और है ।💨 4.  फवारे के बदले हाथ से धोने का मजा भी अलग ही होता है ।👋 5. चाय में Tea-Bag  डालके पीने से ज्यादा मज़ा तो छान कर पी जाने वाली चाय में है ।☕ 6. कितना भी कार्टून देख लो पर असली मज़ा तो शक्तिमान देखने मे है ।🤗 7. सिर में कितना भी Jasmine Oil लगा लो पर असली मज़ा तो सरसो के तेल में है ।💇 8.  सिनेमा हॉल में कोई भी सीट मिले पर असली मज़ा तो Corner वाली सीट पे आता है । (स्पेशल : - प्रेमी युगल)👩‍❤‍💋‍👩 9. बस में कितना भी विंडो सीट मिल जाएं  पर मज़ा तो छत में बैठकर जाने में है ।🚌 10. शादी में कितना भी स्वादिष्ट खाना क्यों न मिल जाये पर असली मज़ा तो दुल्हन की सहेलियों को ताड़ने में है ।😍 इसी तरह के और Posts के लिए click #Vikramgautamblog.blogspot.com

जलन - जरूरी है ।

बचपन से हमे सिखाया गया कि कभी किसी की तरक्की से जलना नही चाहिए । येह भी कहा जाता है कि जलन और ईर्ष्या मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं । पर मेरे मत अनुसार जलन सकारात्मक भी होता है जो  अत्यंत आवश्यक है । दूसरों की सफलता से जलन भी कभी कभी व्यक्ति को सफल बनाने में बहुत मदद करती है । कैसे ?............. जब व्यक्ति को अपने किसी करीबी की सफलता से जलन होने लगती है तो उसके दिमाग मे 2 तरह के ख्याल आएंगे. 1. उस व्यक्ति को देखकर और उससे कुछ सीखकर खुद भी सफल बनाने की कोशिश करे । (सकारात्मक जलन) 2 . या उस सफल व्यक्ति की सफलता में परेशानी खड़ी कर दे । (नकारात्मक जलन) यदि व्यक्ति सकारात्मक जलन अपना लेता है तो वो भी सफलत पाने के लिए मेहनत करना शुरू कर देगा । जो एक अच्छा प्रभाव है । और ऐसा भी होना चाहिए । सकारात्मक जलन आपको स्वयं से कुछ अलग करने के लिए प्रेरित करती है । येह आपको नए मार्ग दिखाती है जो सफलता पाने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होती है । सकारात्मक जलन आपके अंदर रचनात्मकता शक्ति का विकास करती है । यह आपको दूसरों से आगे निकलने में प्रेरित करती है , क्योंकि आपको अगर किसी की सफलता ...

GF का महत्व

आजकल गर्ल फ्रेंड बनाना एक प्रचलन बन गया है । कोई अकेला नही है (सिवाए मेरे)😥 पर गर्ल फ्रेंड का होना भी एक वरदान से कम नही है । कैसे ? चलिए बताता हूँ :- 1. कभी शर्म का अनुभव नही होगा दूसरी महिलाओं से बात करने में । जिससे उसके जीवन मे GF का अभाव नही रह पाएगा । दूसरी को अपनी प्रियतमा बनाने में अब उसे महारत हासिल होने लगेगी ।🤘 2. कंजूस लड़के भी पैसे कहा खर्च करना है सीख जाएंगे । जिनके जेब से कभी 10 का नोट नही निकलता था अब वो भी 100-200 के मोबाइल रिचार्ज करने लगेंगे । 💰 3. कभी अकेलेपन का अनुभव नही होगा। क्योंकि दिलो दिमाग में केवल एक ही शक्ति का वास होगा ।👸 4. मोबाइल पे ध्यान काम लगेगा और मोबाइल पर शुद्ध वस्तुओं का ही संग्रह मिलेगा ।😌 5. एक ही जैसी 10 वस्तुओं  पर 100 फर्क निकलने की अद्भुत शक्ति का विकास होगा ।😎 6. सुबह सुबह 4 बजे GF  को मैसेज करने के चक्कर मे माता पिता येह समझने लगे जाएंगे कि लड़का सुधर गया है और समय का पालन करना सीख गया है , तभी तो इतनी जल्दी जाग गया ।🤗 7. कभी स्कूल न जाने वाला लड़का भी रोज (संडे को भी) कॉलेज के 2 चक्कर लगा आता है |💃 8. जिसे सिर्फ ...

बेवकूफ बचपन

बेवकूफ बचपन बचपन जिसे लोग कितना खुशनूमा पल समझते है पर यही पल हमें बेवकूफ बनाता है। इन्सान जवान हो जाता है । अक्ल आ जाती है ।सोचने समझने की बुद्धि विकसित हो जाती है । मनुष्य समझदार हो जाता है । बड़े हो जाने के बाद हम "जात" "धर्म" "लिंग" और "समाज" की चिंता करने लगते हैं । हम जब जवान होने के राह पर होते है तो लोग हमें जाती का बोध करा देते है ।जिससे हम बचपन मे बिल्कुल अनजान थे । फिर हम लोगों को छोटी जाती, बड़ी जाती का दर्जा देने सीख जाते है । धर्म का ज्ञान हो जाता है । कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई सिख कोई ईसाई , येह धर्म बड़ा है,  येह धर्म अच्छा नही है। ब्राह्मण होने का गुरूर भी कम नही होता । धर्म के लिए लड़ाई की जाती है । छोटी सोच वाले लड़के लड़की के बीच भेद करने लगते हैं । हर वस्तु को समाज से जोड़कर देखा जाता है फिर फैसला लिया जाता है । और ये सब हमे जावान होने के साथ साथ सिखा दिया जाता है। बचपन हमे अंधेरे में रखता है । तभी तो हम येह बहुमूल्य बातें बाद में जान पाते है । बचपन हमे इन सब बातों से दूर रखता है । हम  तो कहां जात देखे बिना दोस्ती क...