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Showing posts from June, 2018

Yoga - The Art of Living and Science - योग - जीवन जीने की कला और विज्ञान !

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योग - जीवन जीने की कला और विज्ञान!  योग!  सिर्फ एक शब्द नहीं अपितु एक मार्ग है स्वयं को स्वस्थ रखने और परमात्मा से स्वयं को जोड़ने का। बचपन में अध्यापक विद्यालय में कहते थे-योग का अर्थ है आत्मा को परमात्मा से जोड़ना परन्तु उस समय इसका अर्थ कदापि समझ नहीं आया परन्तु इसे आजमाने और इसे स्वयं में ढालने के पश्चात अब इसका अर्थ समझ आया। परन्तु अब इसके अर्थ में एक और सूत्र जुड़ गया और वो है:- योग-जीवन जीने की कला और विज्ञान! फिर से आज कईं लोग असमंजस में हैं कि आखिर "योग - जीवन जीने की कला और विज्ञान" कैसे है ? चलिए जानते हैं कैसे ! परन्तु आगे बढ़ने से पहले आपको यह समझना होगा की इसका अर्थ आपको तभी समझ आएगा यदि आप इसे अपने जीवन में अपनाएंगे। केवल पुस्तक में पढ़े अनुसार सिर्फ समझने से कुछ नहीं होगा बल्कि इसे अपने निजी जीवन में आजमाना अत्यंत आवश्यक है। योग-जीवन की कला!  हम सब दिन प्रतिदिन अनेक कार्यों में संलग्न होते हैं। हर व्यक्ति किसी न किसी कार्य/कला में माहिर होता है। कोई अच्छा डॉक्टर होता है तो कोई अच्छा इंजीनियर। उसी प्रकार योग भी जीवन की एक कला है। जिस प्रकार हम अपने ...

India's Foreign Policy - भारत की विदेश निति !

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शब्द थोड़े कम हैं पर विचारों में कमी नहीं. कभी कभी एक छोटी सी चोट भी गहरा छाप छोड़ जाती है। इसी के साथ मैं "विदेशी नीति हमारे विकास के लिए एक साधन" विषय पर अपनी राय रखता हूँ। पहले इसका अर्थ समझ लेते हैं - एक देश की विदेश नीति, जिसे विदेशी संबंध या विदेशी मामलों की नीति भी कहा जाता है राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने, अपने अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाये रखने, विदेशी स्तर पर लक्ष्य हासिल करने और देश के विकास के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने से सम्बंधित हैं। इसका मुख्या लक्ष्य दूसरे देशों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने और देश के विकास में सहायता प्राप्त करने व सहायता प्रदान करने से है। भारत की विदेश निति उभरते भारत के लिए एक नयी सौगात है। जिस तरह भारत के प्रधानमन्त्री विदेशी देशों के साथ सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे अभी ली गयी विदेशी नीतियों का फल भारत को विकसित देश के रूप में मिलेगा। 1947 के बाद विदेशी नीतियों की असफलता के बाद माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी से शुरूआती दिनों में ही कईं देशों के साथ विदेशी नीतियों और विदेशी सम्बन्ध को बनाये ...

Some Changes Required in Schools - यह बदलाव जरूरी हैं!

आजकल के हालात को देखते हुए यह मेरे कुछ विचार है विद्यालय में कुछ बदलाव के बारे में, जिनसे मैं मानता हूँ कि बदलाव आ सकता है यदि इन उपायों को सही रूप से लागू किया जाए। 1. वातावरण - सर्वप्रथम, विद्यालय के वातावरण को बदलना होगा। एक अभिभावक सबसे पहले विद्यालय का वातावरण, रूप और सुंदरता देखता है तभी अगले आयाम तक पहुचता है, यदि उन्हें वातावरण ही अच्छा न लगे तो आगे की बात ही नही बढ़ती। अतः इसके लिए समय समय पर विद्यालय की मरम्मत, राग रोगन, सफाई, दीवारों में शैक्षिक विचारों व चित्रों का प्रदर्शन जैसे कार्यों को पूरा कर लेना चाहिए। विद्यालय सुंदर होगा तो बच्चों का भी पढ़ने में मन लगा रहेगा। 2. नैतिक शिक्षा - विद्यालय में पाठ्यपुस्तक के ज्ञान के अलावा दैनिक जीवन से जुड़ी शिक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए। जैसे  दैनिक जीवन की परेशानियों का निपटान कैसे किया जाए, परेशानी के समय कैसे उस समस्या का समाधान किया जाए इत्यादि। इससे यह फायदा होगा कि  विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के ज्ञान के आधार पर नैतिक शिक्षा को जीवन मे अपनाकर जीवन की परेशानियों का सामना आसानी से कर सकते हैं।   3. प...