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Showing posts from February, 2018

ऐसी होली मत खेलो !!

होली ! रंगों का त्यौहार ! खुशियाँ मनाने का त्यौहार ! और भी जाने क्या क्या। ... !! पर बुरा तब लगता है जब होली से 10 - 12 दिन पहले ही लोग गुब्बारे में पानी भरकर लोगों पर मारते हैं।  कोई व्यक्ति खुश है , ऑफिस से घर जा रहा है , कोई अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करना है , तभी उसके ऊपर पानी भरा एक गुब्बारा मारा जाता है।  उसका उत्साह और उसकी ख़ुशी सब गायब हो जाती है। शायद वही ख़ुशी उसके चेहरे में कईं दिनों तक न आये और उस एक घटना का प्रभाव उसपर इतना रहेगा की वो हर होली में उस घटना को याद करके दुखी होगा । कोई व्यक्ति दुखी है , उसके ऊपर भी गुब्बारा मारा जाता है , उस दुख  को कोई नहीं समझ सकता।  सबसे ज्यादा प्रताड़ित लड़कियों को किया जाता है।  उन पर ही सबसे ज्यादा हमले किये जाते हैं और वो बेचारी कुछ कर भी नहीं सकती।  यह सब चीजें दिखाती हैं हमारे समाज की छोटो सोच , निर्दयी भावना जिसे दूसरों की ख़ुशी , दुख और मजबूरी का अहसास नहीं होता।  उन्हें तो बस उस  क्षणभंगुर सी ख़ुशी दिखती है जिसके कोई मायने नहीं हैं। आपको किसी ने मना नहीं किया होली खेलने को प...

मात्रा नहीं संतुष्टि मायने रखती है !!

ज्यादा मिलने से कुछ नहीं होता बल्कि थोड़े  में भी जो ज्यादा संतुष्टि मिलती है वो मायने रखती  है।  कहने को तो हम दो रोटी (सिर्फ दो आटें के पेड़े) और थोड़ी सी सब्जी ही खाते हैं पर उससे मिलने वाली संतुष्टी अपार होती है।  जिंदगी में ज्यादा का इरादा करना बुरा नहीं है पर ज्यादा मिलने पर उसका कैसे इस्तेमाल करना है वो महत्वपूर्ण है।  जब कोई चीज ज्यादा मिले तो उसकी इज्जत कम हो जाती है , हम उसका दुरुपयोग करने लग जाते  हैं या उसका असली मूल्य नहीं जान पाते पर जब हमे कोई चीज कम मिलती है तो हम उसकी अहमियत जानते हैं और उसे सहेजकर  रखते हैं।  चलिए एक उदहारण देखते हैं , पहले 300 रूपए में 1 GB Data मिलने पर हम उसका सोच समझकर प्रयोग करते थे पर जैसे ही 300 रूपए में Unlimited मिलने लगा तो हम अब उसकी Value भूल रहे हैं।  ठीक है प्रयोग करिये पर सावधानी पूर्वक और सही जगह पर व सही समय पर जिसमे आपका हित  हो पर दूसरों को नुक्सान न पहुँचे। एक बात तो जरूर सुनी होगी "हर चीज की अति नुकसानदेह होती है" . इसलिए जो है उसमे संतुष्ट रहें और ...

खुशियों भरी जिंदगी नहीं सामान्य जिंदगी में खुशियां ढूँढो !

रोज की तरह वही घिसी पिटी  जिंदगी का सामान्य सा चक्र जीते जीते तुम बोर नहीं हो जाते ?  कब तक ऑफिस से घर और घर से ऑफिस का ही चक्कर लगाते रहोगे , जिंदगी में कुछ मसाला लाओ ? यही बातें कईं लोग मुझसे रोज कहते हैं।   तो फिर मेरा जवाब क्या होता है ? सुबह सुबह 6 बजे उठकर योग करता हूँ जिससे मेरा तन स्वस्थ रहता है  और जो मुझे कईं बीमारियों से बचाता भी है।   अखबार पढ़ना , समय से नहाना, नाश्ता करना , माता पिता के साथ समय बिताना, बच्चों को स्कूल छोड़कर आना और पत्नी के साथ प्यार भरी बातें करना मेरे मन को प्रफुल्लित करता है।   एक ख़ास बात, मैं  कभी काम की चिंता घर नहीं लाता और घर की चिंता को काम के समय हावी नहीं होने देता।   9 बजे आराम से ऑफिस के लिए निकल जाता हूँ। माता पिता का आशीर्वाद और  पत्नी से Goodbye Kiss लेकर।   रास्ते में ऐसी कईं चीजें मिलती हैं जो कभी ख़ुशी देती तो कोई चीजें जिंदगी की चुनौतियों से लड़ने की शिक्षा और हिम्मत देती हैं।   रास्ते में रोज उन  छोटे छोटे Puppy's को खेलते देखना, सब्ज...

प्रेम राग - भाग 2 !

आज किसी तरह उसने उसका नाम जाना : - गायत्री।    नाम की तरह वह भी शुद्ध और एक अनमोल काया थी।   अब आपको बताते हैं उसका नाम जिसकी चर्चा शुरू से हो रही है : - ओम (ॐ) ओम और   गायत्री - आदिकाल से चला आ रहा एक ऐसा संगम जिसे आज तक कोई अलग नहीं कर पाया।   बस , अब हमारी कहानी आगे बढ़ती है। अपनी क्लास से ज्यादा ध्यान उसका 1st ईयर की क्लासेज की तरफ होती थी। एक दिन गलती से गायत्री और ओम कॉलेज के गेट में टकरा गए फिर जो आंखों ही आंखों में बातें हुईं उसकी गूँज से पूरा ब्रह्माण्ड शांत हो गया।   एक बात तो यह की हमारे ओम थे बहुत शर्मीले स्वभाव के , नहाते समय खुद को देखने में भी शर्माते थे उनके लिए ऐसा पल एक अत्यंत दुविधापूर्ण समय था।   उधर ओम कुछ बोल नहीं रहे और गायत्री भी शांत। किसी तरह उनके दोस्तों ने उनसे एक दूसरे की उनका परिचय करवाया।   अब तो आलम यह था की अगर 2 दिन भी उसे नहीं देखा तो हमारे ओम परेशान होने लगते थे। रविवार का दिन था , वो छत में   अपनी माँ के साथ कपडे सुखाने आयी , ओम ने   किसी तरह हिम्मत जुटाकर सोचा...

ये हैं असली खतरों के खिलाड़ी !!

आज आपको कुछ ऐसे खतरों के खिलाड़ियों से मिलवाते हैं जिनके कारनामे पढ़कर   आप भी हैरानी में पढ़ जाओगे और सोचोगे की ऐसा कैसे कर लेते हैं यह लोग।   १. आजकल के युग में जिस व्यक्ति के फ़ोन में Tempered Glass नहीं लगा और जिसके फ़ोन के पीछे कोई Back Cover न हो वही होता है असली खतरों का खिलाड़ी।   २. जो व्यक्ति बैंक में भी जाते समय अपना पेन खुद लेकर जाए वो होता है असली खतरों का खिलाडी क्यूंकि हम में से हर कोई जानता है की अगर बैंक में अपना पेन लेकर नहीं गए तो मान लो  10  Minute के काम के लिए 1 घंटे पक्का लग जाने हैं। ३. शादियों का समय हो और मेरे जैसा बंदा जिसके पास शादी में पहनने के कपडे भी न हो। दूसरों से कपडे मांगकर 4 दिन बाद जो कपडे सही सलामत लौटा दे वो होता है असली खतरों का खिलाडी। ४. 9 बजे ऑफिस पहुंचना है। आधे घंटे बाद आयी बस की हालत और फिर भी जो उसमे चढ़ जाए। उन बहुत सारे बाजुओं की सुगंध को झेलते हुए सफर करने वाले को कहते हैं असली खतरों का खिलाड़ी। ५. गर्लफ्रेंड के साथ शॉपिंग जाना ही एक चुनौती है।   10 - 10 थैले एक एक हाथ में लटकाकर ...

एक अलग तरह का Valentine Day !!

14 February - Valentines Day !! प्यार करने वालों का दिन।  कुछ लोग इस प्यार को सिर्फ जवान लड़के-लड़की के बीच में जोड़कर देखते हैं।  पर अगर इस दिन को इतने धूम धाम से ही मना रहे हो तो क्यों न उन लोगों को भी इसमें जोड़ लिया जाए जिनसे हम प्यार करते हैं , जिसकी हम क़द्र करते हैं और जो हमारे लिए सर्वोपरि हैं।   और वो लोग कोई भी हो सकते हैं जैसे :- माता , पिता, भाई , बहन , दोस्त आदि।  इनको भी उस प्यार का अहसास कराओ जो तुम उनके प्रति करते हो।   माँ को एहसास दिलाओ की आपसे ऊपर कोई नहीं। पिता को अहसास दिलाओ की आपके परिश्रम और आपके संस्कार मेरी साँसों  के बंद होने के बाद भी अमर रहेंगे।  बहन को अहसास दिलाओ की तेरी सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है और एक तू ही है जिसने बुरे वक्त में मेरा कभी साथ नहीं छोड़ा जो मैं कभी नहीं भूलूंगा।  भाई को अहसास दिलाओ की अगर तू नहीं होता हो शायद मेरी जिंदगी बेरस होती।  तूने अपनी आधी जिंदगी मेरे नाम कर दी जिसका कोई मोल नहीं है।  दोस्त को अहसास दिलाओ कि मेरे दुःख के समय में जो बातें मैं अपने परिवार को...

चाय का नशा !!

चाय !! एक ऐसी चीज जो पिछले कईं दशक से हवा की तरह फ़ैल रही हैं। जिसका नशा सबको पागल कर रहा है।  अंग्रेज अपने मुनाफे के लिए चीन से चाय लाते थे पर उनको क्या पता की अगले 100 वर्षों में भारत इसका आदि हो जाएगा। आजकल हर कोई चाय का दीवाना है।  बच्चा हो या बूढा , आदमी हो या  औरत सब इसके पीछे पागल हैं।   घर में मेहमान आये, चाय। इंडिया मैच जीत गयी।  खुश हो, तो चाय। मैच हार गयी। दुखी हो, तो चाय। पर इसका असली मज़ा तो बारिश में आता है जब बारिश की बूंदों की ठंडक का अहसास करते हुए आप अदरक वाली चाय और पकोड़े का मज़ा लेते हो। इस अहसास  का कोई विकल्प इस दुनिया में मौजूद नहीं है।  सर्दी का वो दिन जब सुबह बिस्तर में आपकी अर्धांगिनी आपको गरमा गरम चाय के साथ नाश्ता परोसे तो बस मजा ही आ जाता है।  कुछ लोग तो चाय के इतने आदि होते है की इनको अगर नाश्ते में, दोपहर और रात के भोजन में भी खाना न देकर चाय भी दे दो तो ये कुछ नहीं बोलेंगे।  पर चाय के कुछ फ़ायदे भी हैं :-  १) इससे आलस दूर होती है।  २) नींद आपको ज्यादा परेशान नहीं करती।  ३) ड...

प्रेम राग - भाग 1 !

उस दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उसके दिल में एक अजीब सी खलबली मचा दी। प्रेम की एक मीठी मीठी धुन उसके दिलो-दिमाग में कुछ ऐसे बस गयी जिसने उसे पूरी तरह भिगो दिया। आखिर हुआ क्या था उस दिन ? रोज की तरह कॉलेज गया। 2nd Year का विद्यार्थी था वो। मन तो उसका हमेशा पढ़ाई में रहता था।  कभी बाहरी आडम्बर में उसका मन गया नहीं।  प्रेम रुपी नदी की  धारा में वो कभी बहा नहीं।  घर से कॉलेज और कॉलेज से घर।  पढ़ाई  और बस पढ़ाई। पर उस दिन उसके जीवन में एक बहुत बड़ा बदलाव आने वाला था। कॉलेज से घर आया तो आज उस गली में एक अलग सी ही रौनक थी।  चिड़ियों का शोर भी आज उसे मीठी धुन लगी। सीढ़ियों से चढ़ते समय उसने वो एक सुंदर काया देखि , बस एक वो पल था जब उसने किसी को इतने गौर से देखा था , मन में शहनाई बजने लगी , नए गुलाब के खिलने जैसा उसका चेहरा हो गया, एक अजीब सी धुन उसके मन में बजने लगी। शायद उस मोहल्ले में वो आज ही आयी थी।  उसके पिता का तबादला हुआ था।  पता करने से मालूम हुआ की उन्होंने वही पर एक Floor ख़रीदा है। बस उस दिन से उसकी आखें कॉलेज आते-जाते उसी को ढूंढती थी।...