ऐसी होली मत खेलो !!
होली ! रंगों का त्यौहार ! खुशियाँ मनाने का त्यौहार ! और भी जाने क्या क्या। ... !! पर बुरा तब लगता है जब होली से 10 - 12 दिन पहले ही लोग गुब्बारे में पानी भरकर लोगों पर मारते हैं। कोई व्यक्ति खुश है , ऑफिस से घर जा रहा है , कोई अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करना है , तभी उसके ऊपर पानी भरा एक गुब्बारा मारा जाता है। उसका उत्साह और उसकी ख़ुशी सब गायब हो जाती है। शायद वही ख़ुशी उसके चेहरे में कईं दिनों तक न आये और उस एक घटना का प्रभाव उसपर इतना रहेगा की वो हर होली में उस घटना को याद करके दुखी होगा । कोई व्यक्ति दुखी है , उसके ऊपर भी गुब्बारा मारा जाता है , उस दुख को कोई नहीं समझ सकता। सबसे ज्यादा प्रताड़ित लड़कियों को किया जाता है। उन पर ही सबसे ज्यादा हमले किये जाते हैं और वो बेचारी कुछ कर भी नहीं सकती। यह सब चीजें दिखाती हैं हमारे समाज की छोटो सोच , निर्दयी भावना जिसे दूसरों की ख़ुशी , दुख और मजबूरी का अहसास नहीं होता। उन्हें तो बस उस क्षणभंगुर सी ख़ुशी दिखती है जिसके कोई मायने नहीं हैं। आपको किसी ने मना नहीं किया होली खेलने को प...