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Showing posts from April, 2018

Person Standing aside of a Road - सड़क के किनारे खड़ा वो आदमी !

कभी उस आदमी की तरफ ध्यान गया है आपका जो तपती सड़क में, हाथ मे बाल्टी और पेंट ब्रुश लेकर, कड़कती धूप में बैठा रहता है इस आस में कि कोई तो आएगा ही औऱ उसे ले जाये ताकि उसके परिवार को 2 दिन का भोजन मिल जाये। कल मैं यूँ ही बगल के एक दुकान में गया। मुझे उस जैसे 7 आदमी वहाँ पर बैठे दिखाई दिए। मन में करुणा भर आयी मेरी। 4 घंटे बाद फिर मैं उस दुकान में सामान लेने गया तो देखा अभी भी वो 7 लोग वहीं पर बैठे हैं, बस इस आस में की कोई तो काम मिल जाये। उसी दौरान एक गाड़ी से एक महिला उतरी, उन में से एक आदमी के पास। सातों लोग झुंड बना कर खड़े हो गए। महिला ने एक काम बताया और पूछा "कितना पैसा लोगे इस काम का" ? एक आदमी में 400 कहा।  ऐसा सुनकर उस औरत की आँखें इतनी फैल गयी कि पता नही क्या सुन लिया हो। तो उसने कहा "देखो 400 बहुत महंगा कह रहे हो, 200 में करना हो तो बताओ"। वो बेचारे कर भी कुछ नही सकते थे। मन में बस एक बात थी कि किसी तरह आज बच्चों का पेट कैसे भरेंगे। तो एक आदमी मान गया।  मैं भी पीछे पीछे गया उस आदमी के, रास्ते मे उस औरत ने अपने कुत्ते के लिए 800 का खाना खरीदा। फि...

Her Memories - उनकी यादें ! (Poem)

* अक्षरों को सोचा किसी माध्यम में गढ़ दूं! अपने अंतरतम को किसी साँचे में  मढ़ दूं! * शायद नियती में यही लिखी थी उसे भी एक दिन जाना पड़ा जिसके साथ मैंने अपनी वृद्धावस्था देखी थी। * हर बहती अश्रु में अब बस उसी की यादों का फसाना है आँसु भी अब उसकी यादों को जिंदा रखने का एक बहाना है। * जो कल एक हिस्सा थी जिससे सात जन्मों का अनुबंध रचा था, आज वो बस एक किस्सा है। * सुगंध के बिना अब इस चन्दन का क्या महत्व है केवल एक आम काया है, ऊपर के संसार के कटु और मर्मभेदी शब्दों के वारों का साया है। * ईश्वर में मांगी एक दुआ मैंने किसी तरह मिला दे उसे, चाहे ख्वाब में हो या यादों में या बुला ले ऊपर ही मुझे। या ऊपर ही बुला ले मुझे।।

क्या आपका बेटा सच में शरीफ है ??

आजकल के बच्चे जितने शरीफ अपने माता पिता के सामने होते हैं उतने ही कमीने माँ बाप के पीछे होते हैं। सब जानते हैं की बच्चों का रवैया घर में देवता और बाहर शैतान जैसा होता हैं। तो आज हम ऐसे ही कुछ उदाहरण लेकर आये हैं जो ऐसे बच्चों के बाते में कुछ मनोरंजक बातें बताता है। 1.   विदेशी फिल्म में कुछ मसाला न हो तो क्या मज़ा। जब ऐसे बच्चे विदेशी फिल्म देख रहे होते हैं  तभी दो घटनाएं भारत में घटती ही हैं - पहली कि उस फिल्म में मसालेदार दृश्य का आना (आप समझ रहे होंगे में क्या कह रहा हूँ) और दूसरी तरफ उसी समय पिता जी का कमरे में प्रवेश। अब क्या होगा ? तब बच्चा ऐसे शरीफ होने का तांडव करता हैं जैसे उस फिल्म में तो वो भक्ति के दृश्य देख रहा हो। पिताजी के सामने कहेगा : "आजकल फिल्मों में क्या क्या दिखाने लगे हैं। इससे बच्चों में क्या असर पड़ेगा"। इतना कहकर वो टीवी बंद कर लेता हैं और पढ़ाई का ढोंग (पुराना पर असरदार तरीका) करता हैं।   पिताजी के मन में ख़ुशी के फूल खिलने लगते हैं। मेरा बेटा कितना शरीफ हैं! किसी की नज़र न लगे इसे।   पर....सच्चाई तो बाहर दोस्तोँ के सामने य...

प्रेम राग - भाग 4 !

कॉलेज ख़त्म। हमारे ओम अब नौकरी करने लगे थे। साथ ही साथ घर में अब बेटे की शादी की बातें चलने लगी थीं। हो भी क्यों न आखिर बेटा जवान हो गया था , पढ़ाई भी काफी कर ली , बड़ी कंपनी में नौकरी करता है।  घर वाले लड़कियों की तलाश में लग चुके थे। पर हमारे ओम इस सब से बिलकुल अनजान थे। कभी कभी गायत्री से बात होती थी , गहराई से जानने पर मालूम हुआ की गायत्री अब पास के ही किसी शहर में रहती हैं। फिर क्या था हमारे ओम कभी कभार मिलकर आ भी जाते थे पर माता पिता को इसकी भनक तक नहीं लगने देते थे। दोनों एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसमें खा चुके थे , पर आज भी वो गायत्री के साथ शादी की बात अपने माता पिता से करने में शरमाते थे। आखिर वो पल आ ही गया जब माता पिता ने एक कन्या को पसंद कर ही लिया। कन्या पास के ही शहर से थी। अब बात हुई माता पिता की ओम के साथ। कहाँ दूसरी तरफ उनकी प्रेम कथा रंग ला रही थी और कहाँ अब यह हो गया। वो करें भी तो क्या , आखिरकार उन्होंने अपने माता पिता को अपने मन की बात कह दी।   माता पिता ने मना कर दिया। कहा की हम जबान दे चुके हैं। जिन माँ बाप ने पाल पोस कर बड़ा किया ...