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Showing posts from November, 2018

देशभक्ति, राजनीति एवं हिन्दुत्व रुपी त्रिकोण !

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वक्त के साथ लोगों की सोच और दूसरों के प्रति भावनाओं को बदलते हुए देखा है परन्तु कभी भी नकारात्मक भावना को सकारात्मक में परिवर्तित होते नहीं देखा बल्कि सत्यता इसके विपरीत ही मालूम पड़ती है।  एक समय था जब हमारे परम पूजनीय राष्ट्रपिता श्री मोहनदास करमचंद गाँधी जी का सम्मान राह में पड़ा वो एक सूक्ष्म कण भी करता था जो भारत की स्वतंत्रता की राह का साक्षी था। कईं व्यक्तियों ने उनके कार्य को सराहा था, शत्रु भी उनके व्यक्तित्व से प्प्रभावित हो जाते थे, उनकी राह का हर फूल उनके पगों के स्पर्श को अपना सौभाग्य मानता था। और आज उसी महान व्यक्तित्व की महानता पर प्रश्न चिह्न उठ खड़ा है ! आज किसी का भेजा हुआ नथूराम गोडसे का यह लेख पढ़ा।  मैं नहीं जानता इस लेख में कितनी सच्चाई है परन्तु यह अवश्य ज्ञात है की इसमें जो लिखा उसमे आधा असत्य है। आजकल हर व्यक्ति अपने विचारों को किसी स्वतंत्रता सेनानी की छवि के साथ लिख देता है। यह राजनीति का एक और खेला है। इससे लोग लिखी हुई बातों को सत्य मान कर आत्मसाथ कर लेते हैं क्यूंकि हम अपने स्वंत्रता सेनानी का सम्मान करते हैं और राजनीतिज्ञ उसी सम्मान का फायदा उठ...

The Combination of Greed and Religion - धर्म और लालच का संगम !

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कल तक जहां मासूम जानवरों की निर्ममता से हत्या करके उनका मांस बड़े शान से बेचा जाता था आज वहीँ पर, उसी दूकान के समक्ष माता की मूर्ति लगाईं गई है। धर्म के नाम पर व्यापर किया जा रहा है। राम - रहीम के नाम पर सिसयासत हो रही है। केवल धर्म के नाम पर एक दूसरे का नरसंहार किया जा रहा है। मानव धर्म के सामने इंसानियत का क़त्ल कर रहा है। मानवता कलंकित हुई जा रही है। कभी ईश्वर ने यह अनुमान लगाया ही नहीं होगा की एक दिन ऐसा आएगा जब उसी का मंदिर बनाने के लिए इंसान एक दूसरे का क़त्ल करेगा। घर में पत्थर की माता की मूर्ती को सालों तक सजाया जाता है, पूजा की जाती है, उस कमरे के खाली पाँव जाय जाता है, भोग लगाए जाते है परन्तु उसी घर में कन्या की जन्म से पहले ही हत्या कर दी जाती है।  धर्म से पुण्य कमाने को व्यक्ति तीर्थ जाता है परन्तु यह कभी समझ नहीं पाता की जिस तीर्थ का फल माता ने बेटी के रूप में घर में भेजा था उसे जन्म से पहले ही माता को सौप दिया गया है। पूरे वर्ष घर की हालत कूड़ेदान से कम नहीं होती पर दिवाली आने के 2 हफ्ते पहले से ही केवल माता को प्रसन्न करने के लिए, धन की लालच सफाई करने में ...