Beautiful Story of Attraction - नेत्रों का प्रेम जाल !
मैंने कभी मदिरापान तो नहीं किया पर पता नहीं उसकी आँखों में ऐसा क्या छुपा था ! मैंने कभी सोचा नहीं शीतपहर की वो सामान्य प्रातः इतनी ऊर्जामय होगी। सदैव की तरह दफ्तर का समय हुआ था। घर से निकला। घर में किसी बात से खफा था और जाते समय सड़क की वो पथरीली जमीन मेरे आतंरिक क्रोध की परीक्षा ले रही थी। ऊपर से वाहन का समय पर न आना, समय पर दफ्तर न पहुंच पाने की चिंता को उर्जित किये जा रहा था। ईश्वर की कृपा से वाहन का आगमन समय पर हुआ। सीट भी मिल गयी। जैसे ही अपने स्थान में मैंने आसन ग्रहण किया वैसे ही मैंने संगीत यन्त्र निकलकर अपने कानों में संगीत की मधुर ध्वनि से अपनी चिंताओं और क्रोध को शांत करने का प्रयत्न किया। फिर वो घटना घटित हुई जिसके रोज घटित होने का आज तक मुझे सदैव इंतजार रहता है। एक ऐसी भावना ने ह्रदय में घर किया जो अपूर्व थी। उस सुन्दर काया की एक झलक मेरे उस क्रोध और चिंता को ऐसे निगल कर शांति प्रदान कर गयी जिस तरह समुद्र मंथन में निकला विष भोलेशंकर ने निगल कर देवताओं को शांति प्रदान की थी। कान में संगीत के बोल निःशब्द पद गए। सडकों से निकली वाहनों की ध्वनि सुनाई नहीं दे रही थी।...