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Showing posts from January, 2019

Had Someone Heard This - क्या किसी ने यह सुना है !

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1. 11वीं में Commerce (वाणिज्य) विषय लेने के बाद दोस्तों से "अब तो CA बनेगा" कहते हुए नहीं सुना तो क्या सुना ! (C.P.T. के 2 Attempts देने के बाद की सच्चाई - अपुन नहीं बचेगा इधर, मर जाएगा अपुन) 2. सब्ज़ी लेकर आने के बाद माँ से "धनिया लाया की नहीं" कहते हुए नहीं सुना तो क्या सुना ! (सच्चाई - सब्ज़ी की बजाये आटा ले आया, धनिया तो दूर की बात है) 3. दिल्ली वाले - यह घटिया सामन तूने 1,500 का लिया, अगर तू मुझे बोलता न तो मैं 150 दे दिला देता ! (सच्चाई - जब दिल्ली वाला वही चीज 2,000 की खरीद के पहनता है) 4. बच्चे - विज्ञान में रूचि पैदा होने पर - मैं तो पक्का डॉक्टर ही बनूँगा। गणित में रूचि होने पर - मैं तो गणितज्ञ ही बनूँगा। समाजिक विज्ञान में रूचि होने पर - मैं तो अध्यापक ही बनूँगा। (सच्चाई - चू*या बन जाते हैं।)  5. परीक्षा हॉल में पीछे वाला - भाई, दिखा दे, सिर्फ 1 आंसर ही देखूंगा । (सच्चाई - जब तुम्हारे परीक्षा पत्र की फोटोकॉपी नक़ल उस लड़के की परीक्षा पत्र से मिलती है)। 6. एक दोस्त दूसरे दोस्त से - भाई सिर्फ ...

The Game of Religion - धार्मिक क्रीड़ा !

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धर्म - एक ऐसा विषय जिसके बारे में हम कम ही बात करते हैं परंतु अपने दैनिक जीवन मे ऐसे कईं वाकिये और घटनाएं घटित होती हैं जो आपको धर्म के ऊपर लिखने में मजबूर करती हैं। इस लेख का उद्देश्य किसी धर्म को ऊपर उठाना, धर्म की अवहेलना करना, धर्म का प्रचार, किसी के मन को आहत करना और किसी धार्मिक क्रिया को छोटा दिखाना नहीं है। इसमें केवल हमने अपने विचार व्यक्त किये हैं। हो सकता है इनमे से कईं बातों पर आप सहमत हों और कईं बातों पर नहीं, परन्तु इस लेख से यदि किसी को कुछ सीख मिल जाये हो हमारे लिखने का उद्देश्य पूर्ण हो जाए। आज कुछ ऐसी ही घटनाओं का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि क्या ऐसा करना या ऐसे कृत्य सही हैं। 1. आज सुबह एक महिला दिखीं जो नंगे पांव घर से मंदिर जा रहीं थीं। सुबह सुबह इतनी ठंड, खाली पैर और सड़क की मिट्टी से भरपूर जमीन। मंदिर भी पास नही बल्कि लगभग 2 KM का सफर।  उनके लिए यह शायद आस्था का विषय था परंतु कभी इसके नकारात्मक प्रभाव की तरफ किसी का ध्यान नही जाता। 4℃ की इतनी सुबह में घर से निकलना ही घातक है। ऊपर से नंगे पांव। सड़क का गंदा पानी, रेत, जानवरों का मल और न जाने क्या क्या उन पै...

Knowledge you Gain from Office Life - दफ्तर की सीख !

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वैसे तो दफ्तर में हम अपने कार्य से सम्बंधित कईं बातें रोज सीखते रहते हैं परन्तु उसके अलावा ऐसी कईं चीजें हैं जो हम सीखते हैं। चलिए आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे तथ्य जो आप दफ्तर में कार्य के अलावा सीखते हैं। 1. सबसे पहले आप सीखते हो कि तरह तरह से लोगों से मेल मिलाप और वार्तालाप कैसे किया जाता है। जब आप पढ़ रहे होते हैं तो आपकी मुलकात केवल पढाई से सम्बंधित व्यक्तियों से ही होती है परन्तु दफ्तर में आपको कईं क्षेत्रों से सम्बंधित लोग मिलते हैं। हर व्यक्ति से अलग तरह की बातें और अलग व्यवहार आपको विविधता में संचार करने में सहायक सिद्ध होती है। 2. अब आपकी ऐसे लोगों से मुलाकात होगी जिनसे यदि आपकी पहचान अच्छी हो जाए वो व्यक्ति आपके जीवन के कईं पहलुओं में काम आएगा। दफ्तर में आया हर व्यक्ति अलग अलग क्षेत्र में निपुण होता है। कोई व्यापर में, कोई संचार के क्षेत्र में, और न जाने कहाँ कहाँ। यदि आप सभी व्यक्तियों से अच्छे सम्बन्ध बरकरार रखते हैं तो वो व्यक्ति किसी न किसी रूप में आपके जीवन के कईं मुश्किल क्षेत्र में सहायक सिद्ध होगा। 3. आपके नए मित्र बनते हैं। ऐसे मित्र जो...

Why Someone Writes - कोई क्यों लिखता है !

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क्या आपने कभी सोचा है की कोई व्यक्ति क्यों लिखता है?  उसे क्या जरूरत है अपनी बातों और अपने विचारों को दूसरों के समक्ष रखने की जबकि वो आसानी से किसी को भी मौखिक रूप में वो बात बता सकता है। आज यही बात जानेंगे कि किसी व्यक्ति के लिखने के पीछे क्या क्या कारण होते हैं। कुछ कारण मेरे भी होंगे और कुछ ऐसे भी होंगे जो दूसरों से जुड़े होंगे। 1. लेखन से प्रेम:- मेरे जैसे व्यक्ति लिखते हैं क्यूंकि उन्हें लिखना अच्छा लगता है। ऐसे व्यक्ति यह नहीं सोचते की मेरे लिखने से मेरा फायदा होगा या नुकसान, यह तो बस इसलिए लिखते हैं क्यूंकि लेखन ने इनके जीवन में एक गहरी छाप छोड़ी है। भूतकाल में हुए लेखन से जुड़े ऐसे कई वाकिये इनको लेखन की तरफ आकर्षित करते हैं। 2. पेट की भूख:- यह वो व्यक्ति होते हैं जिन्होंने लेखन को केवल व्यापर के नजरिये से देखा है। यह लेखन प्रेम को रोजगार के रूप में परिवर्तित करते हैं। इनके लिए लेखन प्रेम के साथ साथ रोजगार का एक साधन भी है। यह हर लेख में अपना लाभ खोजते हैं। इनका मूल उद्देश्य केवल लेखन नहीं अपितु लाभ लेखन है। 3. संचार का साधन:- कुछ इसलिए लिखते हैं ताकि वो अपनी बातों को दू...