जिंदगी का वो पल !!!!

जिंदगी का वो पल कहाँ और कैसे पीछे छूट गया पता ही नही चला । बस रेत की तरह हाथ से फिसल गया ।
शिक्षा अर्जित करते करते बचपन निकल गया ।
भविष्य सुनहरा करते करते जवानी निकल गयी ।
और दूसरों के लिए करते करते बुढापा निकल गया ।
बस अब अंतिम सांसें गिन रहे हैं । पहले क्या क्या सोचा था कि येह करेंगे वो करेंगे पर जब लगा कि अब समय आ गया तो ऊपर से बुलावा आया । सपनों को पूरा करते करते अपने ही सपने कब और कैसे खत्म हो गए पता ही नही चला ।
अभी जिंदगी के आखरी लम्हों में वो बातें याद करता हूँ कि बस सुकून से मुक्ति मिल जाये ।
जब से होश संभाला तब से बहुत शिक्षा अर्जित करने की चाह थी क्योंकि किसी ने कहा कि अगर नही पढोगे तो नही बढ़ोगे। तो पढ़ाई में बचपन निकल गयी ।
कोई नही ।
फिर उसके बाद कहा गया कि एक अच्छी नौकरी ढूंढ लो । तो निकल पडे हम भी । 1 दिन वो नौकरी भी मिल गयी जिसका कब से इंतज़ार था ।
फिर ज़िन्दगी नौकरी की तरह बस चलती गयी।
कोई नही ।
फिर शादी करने का दवाब बना।  शादी भी कर ली । माँ बाप को घर मे बच्चों की किलकारियां सुननी थी । वो मुराद भी पूरी हो गयी ।
अब बस क्या होना था?
नौकरी , परिवार , बच्चे , पत्नी और उलझानों में जिंदगी बीतती गयी । पता ही नही चला कि कब ऊपर से बुलावा आया गया । आज जीवन के अंतिम लम्हों में यही सोच रहा हूँ कि काश वो कर लेता - काश ये कर लेता  । पर अब क्या कर सकते है समय और मौका पीछे छूट गया ।
पूरी जिंदगी तो दूसरों के लिए जिये पर अब जब अपनी जिंदगी जीने का मौका आया तो हम किसी और को प्यारे होने जा रहे हैं ।
अब न मौका है ना समय।  जा रहे हैं हम । जा रहे हैं हम । ..............!!!!
बस अब यही कह सकता हूँ । दूसरों के बारे में सोचो पर उससे पहले अपने सपने भी जियो , क्योंकि जब तक तुम खुद  अपने सपने पूरे करना नही सीखोगे तब तक दुसरो के सपने सवारने में मुश्किल आएगी । 

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