यह पोस्ट पढ़कर बस गाली मत देना !!


सबसे सुखद अनुभाव जब तुम किसी के ऊपर गुस्से से लाल हो रहे हो , तो वो है "गाली देना"।
सुनने में अजीब लगे पर जब तुम्हे गुस्सा आता है तो तुम गाली पक्का देते हो चाहे मन में ही क्यों न हो ।
हम भारतीय इसमें तो काफी आगे हैं । 

सबसे बड़ी बात , वो लोग जो गाली देकर अपना मुंह गंदा नही करना चाहते वो "कुत्ता" या "*तिया" कहकर अपना दिल बहला लेते हैं । कम  से काम उन्हें ये तसल्ली तो हो जाती है कि उन्होंने गाली नही दी। क्योंकि कुछ विद्वान लोगों के अनुसार ये दोनों गाली नही होती। इन्हें कहते हैं महान आत्मा। 

गाड़ी चला रहे हो , किसी ने साइड से ओवरटेक कर दिया तो ऐसी ऐसी गाली हम देते हैं जिसे सुनकर कभी कभी हमे भी शक होता है कि आखिर मैने यह गालियाँ कहाँ से सीखीं । 

बॉस ने डांट दिया , अब गाली देने का मन है पर बॉस ने सुन लिया तो फिर खैर नही । इसलिए बाथरूम में जाकर गालियां निकालते हो । पर सिलसिला एहीं खत्म नही होता । फिर जब जब बॉस का चेहरा दिखता है तब तब गाली तो तुम देते ही हो पर मन मन मे ।

इतना ही नही स्कूल में अगर Examinar ने चीटिंग करते हुए पकड़ लिया तो फिर मन में गाली देने का सिलसिला शुरू हो जाता है । 

किसी ने सड़क में कूड़ा फेंक दिया फिर तुम उसे जी भर के गाली देते हो चाहे बाद में तुमने अपने चिप्स का पैकेट सड़क में क्यों न फेक दिया हो । 

सबसे ज्यादा गालियां तो क्रिकेट मैच देखने के दौरान निकलती हैं । जैसे:-
प्लेयर ने कैच छोड़ दिया - गाली दे दिया ।
अम्पायर का फैसला तुम्हे गलत लगा - गाली दे दिया ।
प्लेयर ने गाली दी : - तुमने भी समर्थन में गाली दे दिया। 
तुम्हारा पसंदीदा प्लेयर जल्दी आउट हो गया - गाली दे दिया।  इत्यादि ।

भाई  से गुस्सा हो , गाली देना चाहते हो पर पता है कि जो गाली तुम उसे दोगे वी गाली तुम्हे भी लगेगी । फिर तुम ऐसी गाली सोचते हो जो भाई को तो लग जाये पर तुमपर कोई असर न पड़े। 
Intelligent Boy !

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