इसमें वो पुरानी बात नहीं रही !!!!
१. बारिश हुई और अगर पकोड़े और चाय न मिले तो कहेंगे की आजकल की बारिश में वो पहले वाली बात नहीं रही। खुद बनाने में तो जान निकल जाती है और बेचारी बारिश को दोष दे रहे हैं।
२. मैथ्स के सवाल कर रहे हैं , जवाब नहीं आ रहा तो कहेंगे आजकल के सवालों में वो पहले वाली बात नहीं रही, जैसे की पहले वो सवाल हल कर लेते।
३. What's App प्रयोग कर रहे हैं और कहते है की इसमें पहले जैसी चिट्ठी वाली बात नहीं रही। अरे , तुम्हे रोका किसने है चिट्ठी भेजने के लिए , बेकार में अपनी खींज दूसरी चीजों पे निकालते रहते हो ।
४. दिल्ली में रहकर प्रकृति का अहसास लेना चाहते हैं और कहेंगे की अब दिल्ली में वो पहले जैसी प्राकृतिक सुंदरता नहीं रही। अब इन्हे कौन समझाए की मानव ने ही अपनी सुख सुविधाओं के लिए अपनी प्रकृति को दिल्ली जैसी प्रदूषित क्षेत्र में बदला है।
५. अपने बच्चो से कहेंगे की तुम्हारे समय में हम 90 - 90 % अंक लाते थे चाहे खुद 33% से ही क्यूँ न पास हुए हों , फिर वही कहेंगे की आजकल के बच्चो में वो पहले वाली बात नहीं रही। वैसे भी वो कुछ भी बोले उनको पता है कौन सा बच्चों को हमारी रिपोर्ट कार्ड मिलने वाली है।
६. ऑफिस में वो चौकीदार जो उन्हें रोज सलाम करता था , एक दिन अगर वो भूल जाए तो कहेंगे की आजकल के लोगों में वो पहले वाली सम्मान की भावना ही नहीं रही।
अरे भाई , कभी कभी हम भी इज्जत से सलाम कर देंगे तो हम छोटे नहीं हो जाएंगे।
अगर सामान के हकदार बनना चाहते हो न तो पहले सामान करना सीखो।
७. ऑफिस में चाय मिली , अगर वो अच्छी न लगे तो कहेंगे वो पहले बात नहीं रही रामु तेरे चाय में।
एक तो वो बेचारा तुम्हारे लिए कुछ कर रहा है और अपने निजी जीवन का दुख किसी और की चीज पे निकालते हो तो उस पहुँचाये हुए दुःख के ऋणी हो जाओगे तुम जो शायद जीवन भर न उतर पाए।
८. बीवी से नाराज हो और कहते हो की जानू तुममे अब वो बात नहीं रही जो शादी के समय थी।
वाह , भाई अर्धांगिनी है वो तुम्हारी कोई पुरानी साइकिल नहीं जिसे चेंज कर लोगे , दाम्पत्य जीवन में सामंजस्य बनाकर चलने में ही उसका मजा आता है न की उसमे गलतियां निकालने में।
९. सरकारी दफ्तर में गए , काम नहीं हुआ तो पैसे खिला दिए और कहते फिर रहे हो की आजकल वो पहले वाली बात नहीं रही सरकारी कामकाज में।
क्यों ?
क्यूंकि हम जैसे लोगों ने भ्रष्टार को बढ़ावा देकर फैलाया है। आज हम उसी का फल भ्रष्टार के रूप में भुगत रहे हैं।
१०. कहते फिरते हैं की आजकल की सरकार देश के हित में ठीक से काम नहीं करती , उसमे वो गाँधी , नेहरू वाले जमाने की बात नहीं रही।
मैं पूछता हूँ , क्या तुमने खुद से इस देश के लिए कुछ किया है ? खुद से ????
इस विश्व का एक सर्वव्यापी सत्य है की कोई भी चीज स्थिर नहीं रहती , हमे भी पुरानी बातों को छोड़कर आगे बढ़ना होगा। पुरानी बातो को याद करने से हमेशा पछतावा ही होता है।
अतः , हमे अतीत के सुखद पलों से प्रोत्साहन प्राप्त करके और पुरानी गलतियों से कुछ सीखकर अपने भविष्य और वर्तमान को सवारना चाहिए न की पुरानी बातों को याद करके रोने से।
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धन्यवाद
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