प्रेम राग - भाग 2 !
आज किसी तरह उसने
उसका नाम जाना : - गायत्री।
नाम की तरह वह
भी शुद्ध और एक अनमोल काया थी।
अब आपको बताते
हैं उसका नाम जिसकी चर्चा शुरू से हो रही है : - ओम (ॐ)
ओम और गायत्री - आदिकाल से चला आ रहा एक ऐसा संगम
जिसे आज तक कोई अलग नहीं कर पाया।
बस, अब हमारी कहानी आगे बढ़ती है।
अपनी क्लास से
ज्यादा ध्यान उसका 1st ईयर की क्लासेज
की तरफ होती थी।
एक दिन गलती से
गायत्री और ओम कॉलेज के गेट में टकरा गए फिर जो आंखों ही आंखों में बातें हुईं
उसकी गूँज से पूरा ब्रह्माण्ड शांत हो गया।
एक बात तो यह की
हमारे ओम थे बहुत शर्मीले स्वभाव के , नहाते समय खुद को देखने में भी शर्माते थे उनके लिए ऐसा पल एक अत्यंत
दुविधापूर्ण समय था।
उधर ओम कुछ बोल
नहीं रहे और गायत्री भी शांत। किसी तरह उनके दोस्तों ने उनसे एक दूसरे की उनका
परिचय करवाया।
अब तो आलम यह था
की अगर 2 दिन भी उसे नहीं देखा तो
हमारे ओम परेशान होने लगते थे।
रविवार का दिन था
, वो छत में अपनी माँ के साथ कपडे सुखाने आयी , ओम ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर सोचा की आज तो पक्का बात
करूँगा।
किसी तरह वो ऊपर
गए , अचानक गायत्री के सामने आ
जाने से उनकी सांसें रूक गयीं , इतनी गर्मी में
भी पैर जाड़े की सर्दी की तरह कांपने लगे , होंठ सूख गए।
पर गायत्री की एक
मीठी बोली सुनकर सब शांत हो गया। बातों की पहल गायत्री ने की , फिर क्या बताऊँ जो बातें हुईं उनके रुकने का
नाम नहीं था।
उस रात ओम को
सुकून की नींद आयी , मन शांत था और एक
अपूर्व अनुभव जिसने उसके मन को मिश्री से भी मीठा अनुभव करवाया था।
किसी ने कहा था
की "एक तरफ़ा प्यार की ताकत ही कुछ और होती है क्यूंकि यह बाँकियो की तरह दो हिस्सों
में नहीं बंटा होता"।
पर किसने कहा
यहाँ पर प्यार एक तरफ़ा था। आग तो दोनों
तरफ लगी थी बस इजहार करने की ताक़त किसी में नहीं थी।
और इतनी जल्दी इजहार करें भी कैसे ? यह कोई व्यंजन नहीं की थोड़ी देर में बना लिया
और खा लिया। इसके स्वाद के एहसास के लिए सब्र की जरूरत होती है।
गायत्री भी प्रेम
राग के इसी अहसास में डूबी थी। दोनों एक दूसरे के अहसास से दूर थे बस थी तो एक
दोस्ती जो प्रेम का रूप लेने लगी थी दोनों में।
पर, कभी कोई प्रेम कहानी देखि है जिसमे परेशानियां
न आयीं हो।
इनकी कहानी में
भी एक ऐसा पल आया जब……………………………………………………………………………………………….
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आगे की कहानी
जानने के लिए कृपया अगले लेख की प्रतीक्षा करें।
हम आशा करते हैं
की आपको हमारी यह प्रेम राग की शृखंला पसंद आयी होगी, अतः इसे अपने मित्रों और शुभचिंतकों में शेयर करना न भूलें।
धन्यवाद।
इजहार करें भी तो कैसे........?
ReplyDeleteकुछ रिश्ते मैगी जैसे नहीं दम बिरयानी जैसे होते हैं, धीरी आंच पर पकते हैं काफी कुछ मांगते है और सबसे ज्यादा मांगते है तो इंतज़ार और ये भी सच है मोहब्बत और नौकरी तुरंत मिल जाए तो क़द्र कहाँ होती है!(meri kahani ka अंश)
Waise Mai apko kuch btane layek nhi hu ..... Anubhavhin hu...
Aap aacha likhte ho