प्रेम राग - भाग 1 !
उस दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उसके दिल में एक अजीब सी खलबली मचा दी।
प्रेम की एक मीठी मीठी धुन उसके दिलो-दिमाग में कुछ ऐसे बस गयी जिसने उसे पूरी तरह भिगो दिया।
आखिर हुआ क्या था उस दिन ?
रोज की तरह कॉलेज गया। 2nd Year का विद्यार्थी था वो। मन तो उसका हमेशा पढ़ाई में रहता था। कभी बाहरी आडम्बर में उसका मन गया नहीं। प्रेम रुपी नदी की धारा में वो कभी बहा नहीं। घर से कॉलेज और कॉलेज से घर। पढ़ाई और बस पढ़ाई।
पर उस दिन उसके जीवन में एक बहुत बड़ा बदलाव आने वाला था।
कॉलेज से घर आया तो आज उस गली में एक अलग सी ही रौनक थी। चिड़ियों का शोर भी आज उसे मीठी धुन लगी।
सीढ़ियों से चढ़ते समय उसने वो एक सुंदर काया देखि , बस एक वो पल था जब उसने किसी को इतने गौर से देखा था , मन में शहनाई बजने लगी , नए गुलाब के खिलने जैसा उसका चेहरा हो गया, एक अजीब सी धुन उसके मन में बजने लगी।
शायद उस मोहल्ले में वो आज ही आयी थी। उसके पिता का तबादला हुआ था। पता करने से मालूम हुआ की उन्होंने वही पर एक Floor ख़रीदा है।
बस उस दिन से उसकी आखें कॉलेज आते-जाते उसी को ढूंढती थी। ऐसा कोई पल नहीं जब उसने उस सुन्दर आखों को न ढूंढा हो। उसकी एक मुस्कान पाने के लिए छत में वो २-२ घंटे का इंतजार और उसे देखते ही अचानक से छुप जाना , कभी गलती से उसके बगल में आ जाने से उस भीषण गर्मी में भी उसका शरीर जाड़े की ठण्ड की तरह कपकपाता था , उसकी एक बोली सुनकर उसका तन-मन प्रफुल्लित हो जाता था।
लेकिन वो दिन कुछ ख़ास था जब कॉलेज जाते समय उस सुन्दर काया ने उसका नाम पुकारा। बस , वो एक पल जिसका वो कब से इंतजार कर रहा था।
शायद कोई काम था इसलिए बुलाया था। जाते समय उसके उन गुलाब की पंखुड़ियों सी होटों की मुस्कान देखि फिर उसके ऊपर वो घटा छायी जिसकी बारिश ने उसे पूरी तरह भोगो दिया।
1 हफ्ते बाद वो सुन्दर काय उसे उसके कॉलेज मिली। दाखिला करवाने आयी थी 1st year में।
आखिरकार आज उसके वर्षों रुपी उन 1 हफ़्तों का इंतजार ख़तम हुआ और आज उसने पहली बार उसका नाम जाना।
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फिर आगे क्या हुआ ??
जाने के लिए इंतजार करें अगली लेख का।
प्रेम की एक मीठी मीठी धुन उसके दिलो-दिमाग में कुछ ऐसे बस गयी जिसने उसे पूरी तरह भिगो दिया।
आखिर हुआ क्या था उस दिन ?
रोज की तरह कॉलेज गया। 2nd Year का विद्यार्थी था वो। मन तो उसका हमेशा पढ़ाई में रहता था। कभी बाहरी आडम्बर में उसका मन गया नहीं। प्रेम रुपी नदी की धारा में वो कभी बहा नहीं। घर से कॉलेज और कॉलेज से घर। पढ़ाई और बस पढ़ाई।
पर उस दिन उसके जीवन में एक बहुत बड़ा बदलाव आने वाला था।
कॉलेज से घर आया तो आज उस गली में एक अलग सी ही रौनक थी। चिड़ियों का शोर भी आज उसे मीठी धुन लगी।
सीढ़ियों से चढ़ते समय उसने वो एक सुंदर काया देखि , बस एक वो पल था जब उसने किसी को इतने गौर से देखा था , मन में शहनाई बजने लगी , नए गुलाब के खिलने जैसा उसका चेहरा हो गया, एक अजीब सी धुन उसके मन में बजने लगी।
शायद उस मोहल्ले में वो आज ही आयी थी। उसके पिता का तबादला हुआ था। पता करने से मालूम हुआ की उन्होंने वही पर एक Floor ख़रीदा है।
बस उस दिन से उसकी आखें कॉलेज आते-जाते उसी को ढूंढती थी। ऐसा कोई पल नहीं जब उसने उस सुन्दर आखों को न ढूंढा हो। उसकी एक मुस्कान पाने के लिए छत में वो २-२ घंटे का इंतजार और उसे देखते ही अचानक से छुप जाना , कभी गलती से उसके बगल में आ जाने से उस भीषण गर्मी में भी उसका शरीर जाड़े की ठण्ड की तरह कपकपाता था , उसकी एक बोली सुनकर उसका तन-मन प्रफुल्लित हो जाता था।
लेकिन वो दिन कुछ ख़ास था जब कॉलेज जाते समय उस सुन्दर काया ने उसका नाम पुकारा। बस , वो एक पल जिसका वो कब से इंतजार कर रहा था।
शायद कोई काम था इसलिए बुलाया था। जाते समय उसके उन गुलाब की पंखुड़ियों सी होटों की मुस्कान देखि फिर उसके ऊपर वो घटा छायी जिसकी बारिश ने उसे पूरी तरह भोगो दिया।
1 हफ्ते बाद वो सुन्दर काय उसे उसके कॉलेज मिली। दाखिला करवाने आयी थी 1st year में।
आखिरकार आज उसके वर्षों रुपी उन 1 हफ़्तों का इंतजार ख़तम हुआ और आज उसने पहली बार उसका नाम जाना।
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फिर आगे क्या हुआ ??
जाने के लिए इंतजार करें अगली लेख का।
Wahhh Abhi to romance baki hai....😄
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