ऐसी घटिया सोच को सलाम !!
2. यह वही लोग हैं जो दीवार में कुत्तों की तरह मूतते हैं और अपने ही घर के बाहर पान चबाकर थूकते हैं फिर कहते हैं की इस देश में स्वस्छता नहीं रही। स्वस्छ भारत अभियान फेल हो गया। कोई अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता इसके प्रति। और यह बदलाव की बात करते हैं।
3. बस में बैठे हैं। बगल में एक बूढी महिला सीट न होने पर उस व्यक्ति से सीट देने के लिए कह रही है पर यह हैं कि अपनी ही धून में अकड़ के बैठे हैं। पर बस में सीट की समस्या इनको तभी समझ में आती है जब खुद की माँ या बहन को कोई कहने पर भी सीट नहीं देता। और यह बदलाव की बात करते हैं। दूसरों के साथ भी वैसा व्यवहार करो जैसा तुम दूसरों से अपने लिए चाहते हो।
4. पहले उस पार्टी का गुड़गान करते नहीं थकते थे। चुनाव में उसी पार्टी को वोट भी दिया। पर जब उसी पार्टी ने धोका दिया तो कहते हैं की आजकल कोई भरोसे के लायक नहीं रहा। हमने कहा :- जब तुम्हे पहले से ही पता था की वो पार्टी निकम्मी है तो वोट दिया ही क्यों ? तो उस व्यक्ति का जवाब था :- जी वो हमारी जात का था जी, हमे क्या पता था की धोका देगा ? लो भई अब जाती के आधार पर देश चलेगा। वैसे भी आजकल भारत के कईं पिछड़े हिस्सों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। और यह बदलाव की बात करते हैं।
5. वो पहले बराबरी की बात करते थे। कहते थे की लड़के और लड़कियों में कोई फर्क नहीं होता। सब बराबर होते हैं। यह वही लोग हैं जो 4 बेटियों के बाद भी 1 बेटे के लिए कोशिश करते रहते हैं फिर कहीं जाके रुकते हैं। और यह बदलाव की बात करते हैं।
6. जनसंख्या में वृद्धि देश के विकास के रास्ते में एक बहुत बड़ी समस्या हैं। इसे नियंत्रण करना होगा। वो कहते थे की सबको समय परिवार नियोजन अपनाना चाहिए। 2 बच्चे ही अच्छे। पर बाद में जाकर पता चला की इनके ही घर में पूरी क्रिकेट की टीम तैयार हो रखी है। और यह बदलाव की बात करते हैं।
7. दूसरों को मेहनत करने का पाठ पढ़ाने वाले। जो हमेशा कहते थे की इंसान को हमेशा मेहनत को रोटी खानी चाहिए। मेहनत किये बिना कुछ नहीं होता। चाहे कितनी भी सुख सुविधाएं मिल जाएँ पर मेहनत करना नहीं छोड़ना चाहिए। आज वही लोग थोड़ा पैसा आ जाने पर एक घर खड़ि कर के किराए की कमाई पर जी रहे हैं। और यह बदलाव की बात करते हैं।
8. आजकल वो भी दूसरों को गाली देते हुए दिखाई देते हैं जिनके सदाचार और शुद्ध वाणी की लोग मिसाल देते नहीं थकते थे। हमारे पूछने पर कहते हैं गलती से दे दी। अरे भी 365 दिनों में 728 बार गाली देना गलती से नहीं होता और यह बदलाव की बात करते हैं।
9. बाहर कहते फिरते हैं की हमने अपने बच्चे को पूरी आजादी दे रखी है। हम अपने बच्चे को तनाव और दबाव से दूर रखते हैं। कभी भी बच्चे पर किसी चीज का प्रेशर नहीं डालना चाहिए। हम पूरी तरह इसके विरोध में हैं। असलियत का पता तो तब चला जब हम उनके बच्चे से मिले। हमने पूछा की बच्चे बड़े होकर क्या बनना चाहते हो तो उसका जवाब था :- जी पापा कहते हैं डॉक्टर बनने के लिए पर में CA बनना चाहता हूँ क्यूंकि मेरा मन Commerce पढ़ने में है। और ऐसे लोग बदलाव की बात करते हैं।
10. जिंदगी भर बेटी को घर में बंद रखा। कभी चार दीवारी से बाहर निकलने नहीं दिया। बाद में यही लोग कहते फिरते हैं की बेटियों को पैदा करना ही गुनाह है। कोई फायदा नहीं है बेटी पैदा होने से। अरे भाई तूने मौका दिया उसको अपनी काबिलियत साबित करने का जो अभी यह सब भौक रहा है। और यह बदलाव की बात करते हैं।
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