Person Standing aside of a Road - सड़क के किनारे खड़ा वो आदमी !
कभी उस आदमी की तरफ ध्यान गया है आपका जो तपती सड़क में, हाथ मे बाल्टी और पेंट ब्रुश लेकर, कड़कती धूप में बैठा रहता है इस आस में कि कोई तो आएगा ही औऱ उसे ले जाये ताकि उसके परिवार को 2 दिन का भोजन मिल जाये।
कल मैं यूँ ही बगल के एक दुकान में गया। मुझे उस जैसे 7 आदमी वहाँ पर बैठे दिखाई दिए। मन में करुणा भर आयी मेरी। 4 घंटे बाद फिर मैं उस दुकान में सामान लेने गया तो देखा अभी भी वो 7 लोग वहीं पर बैठे हैं, बस इस आस में की कोई तो काम मिल जाये। उसी दौरान एक गाड़ी से एक महिला उतरी, उन में से एक आदमी के पास। सातों लोग झुंड बना कर खड़े हो गए। महिला ने एक काम बताया और पूछा "कितना पैसा लोगे इस काम का" ?
एक आदमी में 400 कहा।
ऐसा सुनकर उस औरत की आँखें इतनी फैल गयी कि पता नही क्या सुन लिया हो। तो उसने कहा "देखो 400 बहुत महंगा कह रहे हो, 200 में करना हो तो बताओ"।
वो बेचारे कर भी कुछ नही सकते थे। मन में बस एक बात थी कि किसी तरह आज बच्चों का पेट कैसे भरेंगे। तो एक आदमी मान गया।
मैं भी पीछे पीछे गया उस आदमी के, रास्ते मे उस औरत ने अपने कुत्ते के लिए 800 का खाना खरीदा। फिर गाड़ी एक बड़े बंगले में जाकर खड़ी हुई। ध्यान रखना वो आदमी पैदल ही आ रहा है।
औरत ने काम समझाया और घर के अंदर चली गयी।
वो थका हारा आदमी थोड़ी देर के लिए सुस्ताने के लिए बैठ गया। न किसी ने उससे पानी पूछी, न चाय।
4 घंटे काम करने के बात, बदन से टूट चुका वो आदमी घर के अंदर गया तो किसी ने उसे 200₹ दिए, शरीर मे दर्द तो बहुत था उसके पर वो पैसे देखकर उसका दर्द थोड़ा कम हुआ।
बाज़ार से उसने आटा और दाल खरीदा और घर को निकल गया।
इसी तरह वो आदमी रोज इसी आस से वहीं रोड पर खड़ा होकर इन्तजार करता।
फिर मैं हम जैसे लोगों के बारे में सोचने लगा कि हम जिंदगी में छोटी छोटी समस्या का सामना न कर पाने पे मरने को आतुर हो जाते है, कहते रहते हैं मेरी जिंदगी ही सबसे बेकार है। भगवान को कोसते रहते हैं कि हे भगवान तू मुझे इतने कष्ट क्यों देता है चाहे कष्ट एक सुई के चुभन सी ही क्यों न हो।
1. खेलते समय आउट हो गए तो ऊपर देखकर गाली देता है इंसान, पर यह आदमी किसी के 100 बार भी डांटने पर कुछ नही बोलता और बस अपने काम मे लगा रहता है।
2. 10th की परीक्षा में काम अंक आये हो आत्महत्या करने की कोशिश करते हैं, पर इस आदमी के ऊपर अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी है फिर भी यह मरने जैसी चीज सोच भी नही सकेगा। यह होती है शहनशक्ति।
3. पहले भोजन ज्यादा लेंगे और ज्यादा हो जाये तो ऐसे फेंक देंगे जैसे अपने पिताजी की भोजन की फैक्ट्री हो, पर इस व्यक्ति को देखो बेचारा 200 रुपये में अपने परिवार को एक हफ्ते तक खिलाता है।
4. किसी को सब्र क्या होती है पता नही, बस हर चीज झट से चाहिए। यह व्यक्ति पूरे दिन उस सड़क में खड़ा रहता है सिर्फ एक उम्मीद बांधे हुए।
5. आजकल के बच्चों को हल्की सी चोट क्या लग जाती है पूरे मोहल्ले में ढिंढोरा पिटवा देते हैं की मुझे क्या हुआ है कहकर। Social Media में तहलका मचा देते हैं, पर यह आदमी पूरे दिन मेहनत करके अपने दर्द को परिवार से बाँट भी नही सकता यह सोचकर कि कहीं मेरे दर्द का असर मेरे परिवार पर न पड़े।
6. आजकल के इंसान को क्या हो गया है, एक कुत्ते के लिए इतना खर्चा और एक इंसान के मेहनत की कोई कीमत नही।
7. घर आये हुए भिखारी को भी इंसान एक गिलास पानी पूछता जरूर है यह आदमी तो सिर्फ अपनी लगन और मेहनत के बदले अपना हक माँग रहा है:- उसका मेहनताना और एक घूंट पानी। वो भी उसे नसीब नहीं होती।
8. इंसान अपने आप को आलीशान मकान में रहते हुए भी बदनसीब और भाग्यहीन समझता है पर कभी सोचा है उन झुग्गियों और रोड में सोने वालों के बारे में। सिर्फ एक दिन उनकी जगह रहकर देखो तब समझ आएगा।
9. मोलभाव उनसे करो जो तुम्हे ठग रहे हैं ।एक मज़दूर से, एक गरीब से मोलभाव करके क्या मिलेगा। एक नारियल वाले को 10 रुपये ज्यादा देने से कतराते हो पर मॉल में 100 रुपये की ठंडाई के लिए पैसे पत्तों की तरह उड़ाते हो तो क्या यह सही है?
10. सर्दी का मौसम तुम्हारा पसंदीदा होगा क्योंकि तुम्हारे पास संसाधन हैं उससे सर्दी के निपटने के लिए पर कभी उनका सोचना जिनको इतनी सर्दी में भी बाहर बिना किसी अतरिक्त संसाधन के सोना पड़ता है। उनको कभी 2 कंबल देकर देखो तो सर्दी का मौसम और भी अच्छा लगने लगेगा।
निष्कर्ष यह निकलता है, कभी भी किसी गरीब, किसी लाचार की मदद के लिए मत कतराओ, उनका शोशण मत करो, यह मत सोचो कि वो हमें ठग रहे हैं। बस सच्चे दिल से उनके लिए जो तुमसे हो सकता है करो, इसका जो अच्छा फल तुम्हे मिलेगा वो उसी समय ईश्वर की डायरी में लिख लिया जाता है जो समय अनुसार तुम्हे जरूर मिलता है।
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