India's Foreign Policy - भारत की विदेश निति !

शब्द थोड़े कम हैं पर विचारों में कमी नहीं. कभी कभी एक छोटी सी चोट भी गहरा छाप छोड़ जाती है। इसी के साथ मैं "विदेशी नीति हमारे विकास के लिए एक साधन" विषय पर अपनी राय रखता हूँ।

पहले इसका अर्थ समझ लेते हैं - एक देश की विदेश नीति, जिसे विदेशी संबंध या विदेशी मामलों की नीति भी कहा जाता है राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने, अपने अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाये रखने, विदेशी स्तर पर लक्ष्य हासिल करने और देश के विकास के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने से सम्बंधित हैं। इसका मुख्या लक्ष्य दूसरे देशों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने और देश के विकास में सहायता प्राप्त करने व सहायता प्रदान करने से है।

भारत की विदेश निति उभरते भारत के लिए एक नयी सौगात है।
जिस तरह भारत के प्रधानमन्त्री विदेशी देशों के साथ सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे अभी ली गयी विदेशी नीतियों का फल भारत को विकसित देश के रूप में मिलेगा।

Picture of Eiffel Tower

1947 के बाद विदेशी नीतियों की असफलता के बाद माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी से शुरूआती दिनों में ही कईं देशों के साथ विदेशी नीतियों और विदेशी सम्बन्ध को बनाये रखने में अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। "Come and Make In India" जैसे नारों के साथ उन्होंने विदेशी देशो को भारत में व्यापार के प्रति आकर्षित किया हैं।

कईं लोगों के मन में यह सवाल आए होंगे की "इस कदम का क्या फायदा होगा भारत के आम लोगों को"? क्या यह कदम भारत के विकास में सहायक सिद्ध होगा?

1. भारत में विदेशी कंपनियों के निवेश से भारत में विदेशी मुद्रा का संचार और मात्रा बढ़ जायेगी जो हमे विदेशों के साथ व्यापार करने में सहायक सिद्ध होगी। जब विदेशी कपंनियां भारत में अपना व्यापार शुरू करेंगी तो वो हमारी मुद्रा के बदले अपनी मुद्रा प्रदान करेंगी जो हमे बाद में अन्य देशों के साथ व्यापार करने में सहायक होगी। इससे विदेशी निति को भी फायदा होगा जो विकास को प्रेरित करेगी। अन्य देशों के आने से भारत में विकास तो होगा ही साथ में हमे भी अन्य देशों में व्यापर करने में आसानी होगी।
सड़कों का विकास होगा जो हर छोटे स्थान को शहर से जोड़ेगी।
कारखानों का निर्माण और नयी उपभोक्ता वस्तुओं का निर्माण संभव हो सकेगा जिससे भुखमरी जैसे समस्या समाप्त हो जायेगी।
वस्तुओं के अधिक उत्पादन से बिक्री मुल्य में गिरावट आएगी जिससे उपभोक्ताओं को वस्तुएं सस्ती दरों में उपलब्ध होंगी।
नयी इमारतों के बनने से सबका अपना घर होने की इच्छा पूरी हो पाएगी। इत्यादि ।

2. रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। बेरोजगारी की समस्या सम्माप्त हो पाएगी और रोजगार के लिए भारतीय युवाओं को विदेशों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

Man Holding White Linen Ad White Towel

विदेशी निति में विकास से रोजगार क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होगी। लोगों को अब रोजगार के लिए देश के बाहर नहीं जाना पड़ेगा। विदेशी व्यापर और विदेशी सहयोग से अब लोग अपनी काबिलियत का नमूना अपने देश में ही दिखा सकते हैं। ऐसा कहा जाता है की अमेरिका के 30% वैज्ञानिक भारतीय हैं। यदि विदेश निति में अच्छे बदलाव होते हैं तो हमारे वैज्ञानिक अब अपने देश में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

Microsoft के CEO और Google जैसी कंपनियों के मुख्य व्यक्ति आज एक भारतीय हैं जो विदेश निति की सफलता का उदहारण हैं। यदि हमारे अन्य देशों के साथ सम्बन्ध अच्छे नहीं होते शायद आज हम इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते। आज हमारे कईं भारतीय विदेशों में कार्येरत हैं और देश के विकास में अपनी भूमिका निभा रहे हैं जो विदेश निति सफलता को प्रोत्साहित करती है।

3. निर्धनता कम होगी क्यूंकि विदेशी निवेश से रोजगार उत्पन्न होंगे जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को कार्य मिलेंगे। फलस्वरूप आमदनी होगी जिससे निर्धनता की समस्या समाप्त हो सकेगी। आज भी भारत के कईं लोग गरीबी रेखा से निचे गुजर बसर कर रहे हैं, जो भारत में निर्धनता की दशा को दिखाता है। विदेशी निति में सुधार से लोगों को रोजगार मिलेगा जो आमदनी का श्रोत होगा। आमदनी से लोग अपनी गरीबी को समाप्त कर सकते हैं।

Person Holding Coins

4. भारत के सकल घरेलु उत्पाद में बढ़ोत्तरी होगी। देश के अंदर उत्पादन के बढ़ने से देश में घरेलु वस्तुओं की मात्रा बढ़ेगी जो आयात में कमी करेगी। देश के अंदर स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण से हमारी दूसरे देशों के प्रति आत्मनिर्भरता समाप्त हो जायेगी क्यूंकि अब हम वही उत्पाद स्वयं बना सकेंगे। फलस्वरूप निर्यात में बढ़ोत्तरी होगी जो देश के विकास को नयी ऊचांईयों तक ले जाएगा। 

Grocery Cart With Item

5. विदेशी निवेश से देश में शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी होगी। भारत के विदेश मंत्री विदेश जाते हैं, वहाँ की शिक्षा प्रणाली का अवलोकन करते हैं। विदेशों में शिक्षा की गुणवत्ता को देखते हुए भारत में नयी शिक्षा पद्धती विदेशों से ही ली जाती है। इसी के फलस्वरूप भारत में शिक्षा की दशा काफी अच्छी है। कईं होनहार विद्यार्थी भारत में ही पढ़कार विदेशों में जाते हैं। आजकल तो विदेशों में हिंदी भाषा भी पढ़ाई जाती है और विदेशी कंपनियां भारत में रोजगार के अवसर लेकर आते हैं। यह सब बातें भारत में शिक्षा की विदेश निति की उपलब्धि और सफलता को दर्शाती है।

Newly Graduated People Wearing Black Academy Gowns Throwing Hats Up in the Air

6. विदेशी तकनीक के आ जाने से घरेलु स्तर के उत्पादन में वृद्धि होगी।अधिक उत्पादन मूल्य को कम करेगी जिससे लोगों को कम मूल्य में अधिक उपभोग का विकल्प मिलेगा। तकनीक एक ऐसी चीज जो हर क्षण बदलती रहती हैं। बदलती तकनीक के साथ चलने के लिए विदेशी तकनीक की मदद लेना जरूरी होता है इसलिए प्रभावी विदेशी निति के साथ भारत अपनी तकनीक विदेशी देशों के साथ साझा करके और विदेशी तकनीक का उपयोग करके विकास की गति को बढ़ा सकता है। तकनीक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है चाहे वो उपचार क क्षेत्र में हो या निर्माण क्षेत्र में।
आजकल सेवाओं के क्षेत्र में तकनीक अति तीव्र गति से बदल रही है है इसलिए विदेश निति में जरूरी है की हम दूसरे देशों के साथ सामंजस्य बनाकर चलें तभी देश का विकास संभव है।

Black and Gray Motherboard

7. आजकल कईं बीमारियों के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। जीवन प्रत्याशा दर में कमी आ रही है। अच्छी उपचार सेवाएं न मिलने से मृत्यु दर में भारी इज़ाफ़ा हो रहा है। ह्रदय घात जैसी बीमारियां हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रहीं हैं जिनका रोकथाम कारना और समाप्त करना अति आवश्यक हैं। विदेश निति में अच्छे सुधार करके हम उपचार की नयी पद्धतियों का लेन देन कर सकते हैं ।

Medical Equipment on an Operation Room

ऐसे कईं उदाहरण हैं जो भारत में उपचार के क्षेत्र में विदेशी नीतियों की उपलब्धि को दर्शाती हैं। उदाहरण :- Eman Ahmed from Egypt.
विदेश से लोग भारत में आते हैं इलाज के लिए क्यूंकि भारत में इलाज की प्रक्रिया सरल और किफायती है जिससे लोग हमारे देश की तरफ खींचे चले आते हैं।
यह कार्य एक दिन में नहीं हुआ बल्कि कईं विदेश नीतियों के साथ साथ शिक्षा, तकनीक, निवेश आदि की लम्बी प्रक्रिया का फल है जो हमारे देश में विकास और उन्नति को दर्शाता है।

8. इसी तरह कईं अन्य क्षेत्र हैं जहां भारत की विदेश निति कईं हद तक कामयाब सिद्ध हुई हैं।
जैसे: - परमाणु शक्ति के क्षेत्र में।
खाद्य विभाग में लोगों को सही कीमत पर भोजन उपलब्ध कराने में और खाद्य सुरक्षा को बनाये रखने में।
आपदा के समय मदद की कोशिशों में।
विदेशी स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार में।
किसानों के विकास में ऋण सहायता और खेती की नयी पद्धति के विकास के क्षेत्र में।
लोगों को सस्ते दामों पर सुविधाएं प्रदान करने में।
लोगों के जीवन स्तर में सुधार के क्षेत्र में।
गाँव की उन्नति और शहरीकरण के विकास में।
अंतरिक्ष और खगोलीय क्षेत्र में उचाईयों को छूने में।
समस्याओं के समय अन्य देशों में रह रहे भारतीयों की मदद के क्षेत्र में।
वित्तीय संस्थान जैसे बैंक , बीमा के क्षेत्र के।
छात्रों को पढ़ाई की कईं सुविधाओं को प्रदान करने और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं प्रदान करने में।
और अन्य कईं क्षेत्रों में देश ने विदेशी निति का उच्चतम तरीके से उपयोग किया और विकास को अपनाया।

श्रीमती सुषमा स्वराज - भारत की विदेश मंत्री जिन्होंने कईं प्रयास किए हैं भारतीय विदेश नीतियों को सुचारु रूप से चलाने में। 

भारत में विदेश नीतियाँ कईं बार बनायी गयी पर कुछ न कुछ ऐसे कारण उभर आते हैं जो नीतियों की खामियाँ दिखा जाते हैं। उदहारण के लिए :-

एक तो भारत की अपनी कई सारी विदेश नीतियाँ औपनिवेशिक काल की नीतियों से ली गयीं हैं। इसलिए इसमें रचनात्मकता की कमी दिखाई देती है। सबसे बड़ी खामी तो भारत और पाकिस्तान के बीच दिखती है जिसके लिए किसी उदहारण की आवश्यकता नहीं है। यदि स्वंतन्त्रता के समय भारत की विदेश नीतियां प्रभावशाली होतीं तो शायद आज भारत-पाकिस्तान के बीच में इतने मनमुटाव नहीं होते।


दूसरी ओर नेपाल और चीन का भी यही हाल है। यदि भारत ने नेपाल और चीन के साथ में अपने विदेशी सम्बन्ध अच्छे रखे होते तो शायद आज युद्ध जैसी परिस्थिति उत्पन्न नहीं होती। आज भारत अपने ही पड़ोसियों के बीच में पिसता जा रहा है। जब हमारे अपने पड़ोसियों से ही अच्छे रिश्ते नहीं हैं तो बाँकी अन्य देशों से विदेश नीतियों को साझा करने से विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।


एक तरफ तो हम रूस और अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते की मिसाल देते हैं तो दूसरी तरफ पकिस्तान और चीन से लड़ते जा रहे हैं।
आखिर ऐसा हो क्यों रहा है:- क्यूंकि

1. हम झुकना नहीं चाहते।
बचपन से हमे सिखाया जाता है की सबका सम्मान करो, झुक के रहो, चाहे आसमान छू लो पर पेर धरती पर ही रखना। परन्तु अब क्या हो गया।
हम बस एक दूसरे को निचा देखने में लगे रहते हैं। आज पाकिस्तान ने यह किया, आज चीन ने यह किया और न जाने क्या क्या।

2. राजनीती
आजकल हर चीज में राजनीति ऐसे घुस गयी है की फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है।
उदहारण लेते हैं :- अगर कोई पार्टी योजना बनती है तो चाहे वो योजना अच्छी ही क्यों न हों बांकी पार्टी उसका विरोध करतीं ही हैं। 

Hands With Vote Pins
अरे आप जनता से पूछो की अगर कोई विदेश निति से सम्बंधित योजना बनती है तो क्या जनता उससे राजी है। पर नहीं, एक पार्टी, फिर दूसरी और न जाने कितनी राजनीति के बाद वो योजना डूब जाती है।
काईन बार विदेश निति बनाने के समय भी ऐसी परेशानी आयीं हैं और इसे बंद करना आवश्यक है।

3. दिखावा
भारत में लोगों को शेखी बघारने की आदत है। दिखावा करने में तो हम किसी से पीछे नहीं हैं।
सबको कहते फिरेंगे की हमारी विदेश निति ऐसी है। हमारी विदेश निति वैसी है पर असलियत तो तब मालूम पड़ती हैं जब खुलेआम उस निति को कोई चुनौती दे, जब उस निति की कमी का खामियाजा कोई और भुगतता है। जब किसी को उससे नुकसान होता है।
फिर बात वहीँ पर जाकर ख़त्म होती है - जी हमारी सरकार ने नहीं किया है यह, पिछली सरकार के समय में बना था यह क़ानून। यहां भी राजनीति।

4. गलती से सीखना हमे आता नहीं
चलो मान लिया की किसी विदेश निति में गलती हो गयी। अब क्या ?
उसे सुधारने के बदले हम लग जाते हैं दूसरे को नीचा दिखाने में और गलतियां निकालने में।
यदि हम दूसरों की गलतियां गिनने से पहले उन गलतियों को सुधार लेते तो आज हमारे अन्य देशों के साथ सम्बन्ध सुचारु रूप से चल रहे होते।

5. नएपन की कमी
आज भी संविशान के पन्ने पलटकर देखें तो कई विदेश नीतियां अभी भी अंग्रेजों की दी हुई अपना रहे हैं हम।
बीच में Apple कंपनी के Founder के कहा की भारतीयों में Creativity की कमी हैं।
शायद उन्हें कोई ऐसी चीज दिख गयी होगी जिसमे हम कमतर थे।

आज की समस्याओं दो देखते हुए नयी विदेश निति बनाने में ही भलाई है न की 60 वर्ष पहले की निति को लेकर चलने में।
ऐसी ही काई और कमियां हैं। यदि धीरे धीरे सब कमियों को हटाते जाएँ तो हम विदेश निति को और भी सुचारु रूप से लागू और चला सकते हैं।
जरूरत तो है बस एक पहल की।
परेशानियां कहाँ नहीं आती। हर महान काम करने में परेशान आती है।

गुलाब के फूल तक पहुंचने में काटों का दर्द सहन करोगे तभी तो अंत में सुगंध और सुंदरता का अनुभव मिलेगा।

आज कईं देश भारत से आकार में छोटे हुए भी भारत से कईं आगे हैं। जापान, हांगकांग, सिंगापुर, मलेशिया आदि कईं ऐसे विदेशी देश हैं जिन्होंने अपनी विदेश निति के बूते पर अपने देश की आर्थिक सम्पदा को आसमान तक पहुंचाया हैं। यह देश कईं विदेशी नागरिकों को शिक्षा, रोजगार का अवसर प्रदान करते हैं वो भी अच्छी आमदनी के साथ।

हमारी विदेश नीतियों की सबसे बड़ी कमजोरी यह है की हम केवल दूसरे देशों से आगे निकलने की होड़ में लगे रहते हैं। प्रधानमंत्री जी ने जो कहा था "सबका साथ - सबका विकास" अगर इसी चीज को वैश्विक रूप में लागू करें तो विदेश नीतियां अधिक लाभदायक साबित होंगी।

सफलता के पीछे भागने से पहले विफलता से कुछ सीखना चाहिए तभी उन्नति और प्रगति संभव हैं।

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