Knowledge you Gain from Office Life - दफ्तर की सीख !

वैसे तो दफ्तर में हम अपने कार्य से सम्बंधित कईं बातें रोज सीखते रहते हैं परन्तु उसके अलावा ऐसी कईं चीजें हैं जो हम सीखते हैं।
चलिए आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे तथ्य जो आप दफ्तर में कार्य के अलावा सीखते हैं।
1. सबसे पहले आप सीखते हो कि तरह तरह से लोगों से मेल मिलाप और वार्तालाप कैसे किया जाता है। जब आप पढ़ रहे होते हैं तो आपकी मुलकात केवल पढाई से सम्बंधित व्यक्तियों से ही होती है परन्तु दफ्तर में आपको कईं क्षेत्रों से सम्बंधित लोग मिलते हैं। हर व्यक्ति से अलग तरह की बातें और अलग व्यवहार आपको विविधता में संचार करने में सहायक सिद्ध होती है।
2. अब आपकी ऐसे लोगों से मुलाकात होगी जिनसे यदि आपकी पहचान अच्छी हो जाए वो व्यक्ति आपके जीवन के कईं पहलुओं में काम आएगा। दफ्तर में आया हर व्यक्ति अलग अलग क्षेत्र में निपुण होता है। कोई व्यापर में, कोई संचार के क्षेत्र में, और न जाने कहाँ कहाँ। यदि आप सभी व्यक्तियों से अच्छे सम्बन्ध बरकरार रखते हैं तो वो व्यक्ति किसी न किसी रूप में आपके जीवन के कईं मुश्किल क्षेत्र में सहायक सिद्ध होगा।
3. आपके नए मित्र बनते हैं। ऐसे मित्र जो अब आपको जीवन भर साथ देंगे। स्कूल वाली मित्रता १२वी के बाद खत्म हो जाती है परन्तु दफ्तर की मित्रता जीवन भर साथ रहेगी क्यूंकि आपको भी पाता है कि अब यही लोग आपका दूसरा परिवार है, इन्ही लोगों के साथ आपको अपने आगे के 20 - 30 वर्ष गुजारने हैं।
4. आप कार्य क्षेत्र में यह सीख जाते हैं की दफ्तर के अलावा अन्य कईं श्रोतों से कमाई कर सकते हैं। आपको अपने ज्ञान और अनुभव को अन्य क्षेत्रों के उपयोग करने के मार्ग दिखाई देंगे। एक Accountant (लेखाकार) अपनी Salary (वेतन) के दुगना कमा लेता है, बाहरी श्रोतों से। एक कर्मचारी कार्य करते करते व्यापर के गुण सीख जाता है। निष्कर्ष यह निकलता है की आप केवल दफ्तर तक सीमित नहीं रह जाते। आपको हरकदम उन्नति के पर नए नए मार्ग दिखाई देते है।
चलिए आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे तथ्य जो आप दफ्तर में कार्य के अलावा सीखते हैं।
1. सबसे पहले आप सीखते हो कि तरह तरह से लोगों से मेल मिलाप और वार्तालाप कैसे किया जाता है। जब आप पढ़ रहे होते हैं तो आपकी मुलकात केवल पढाई से सम्बंधित व्यक्तियों से ही होती है परन्तु दफ्तर में आपको कईं क्षेत्रों से सम्बंधित लोग मिलते हैं। हर व्यक्ति से अलग तरह की बातें और अलग व्यवहार आपको विविधता में संचार करने में सहायक सिद्ध होती है।
2. अब आपकी ऐसे लोगों से मुलाकात होगी जिनसे यदि आपकी पहचान अच्छी हो जाए वो व्यक्ति आपके जीवन के कईं पहलुओं में काम आएगा। दफ्तर में आया हर व्यक्ति अलग अलग क्षेत्र में निपुण होता है। कोई व्यापर में, कोई संचार के क्षेत्र में, और न जाने कहाँ कहाँ। यदि आप सभी व्यक्तियों से अच्छे सम्बन्ध बरकरार रखते हैं तो वो व्यक्ति किसी न किसी रूप में आपके जीवन के कईं मुश्किल क्षेत्र में सहायक सिद्ध होगा।
3. आपके नए मित्र बनते हैं। ऐसे मित्र जो अब आपको जीवन भर साथ देंगे। स्कूल वाली मित्रता १२वी के बाद खत्म हो जाती है परन्तु दफ्तर की मित्रता जीवन भर साथ रहेगी क्यूंकि आपको भी पाता है कि अब यही लोग आपका दूसरा परिवार है, इन्ही लोगों के साथ आपको अपने आगे के 20 - 30 वर्ष गुजारने हैं।
4. आप कार्य क्षेत्र में यह सीख जाते हैं की दफ्तर के अलावा अन्य कईं श्रोतों से कमाई कर सकते हैं। आपको अपने ज्ञान और अनुभव को अन्य क्षेत्रों के उपयोग करने के मार्ग दिखाई देंगे। एक Accountant (लेखाकार) अपनी Salary (वेतन) के दुगना कमा लेता है, बाहरी श्रोतों से। एक कर्मचारी कार्य करते करते व्यापर के गुण सीख जाता है। निष्कर्ष यह निकलता है की आप केवल दफ्तर तक सीमित नहीं रह जाते। आपको हरकदम उन्नति के पर नए नए मार्ग दिखाई देते है।

5. आपको रविवार का महत्व पता चल जाएगा। पूरे हफ्ते कार्य करने के पश्चात आता है एक रविवार। इस दिन परिवार के साथ बिताए हर पल को आप पूरे मन से जीते हैं। कभी एक खाली व्यक्ति को पूछना जो काम नहीं करता कि रविवार का महत्व है उसके लिए। वो बोलेगा - रोज के जैसा। परन्तु रविवार की यह रौनक केवल दफ्तर में काम करने के पश्चात ही आती हैं या तब आती है जब आप पूरे हफ्ते व्यस्त रहते हों।
6. अब आप इस लायक बन जाते हो कि आप कोई बड़ी जिम्मेदारी ले सको। बचपन से उच्च शिक्षा तक आप अपने परिवार पर निर्भर होते हैं। जिम्मेदारी के नाम पर आपको बस यह काम दिया जाता है कि माँ के घर पर न होने पर 3 सीटियों के बाद कूकर वाला गैस चूल्हा बंद कर दे। परन्तु अब दफ्तर के कईं कार्यों को अकेले निभाने के बाद आप जीवन की भी बड़ी बड़ी जिम्मेदारियों को अकेले निभा सकते हैं।अब मंजर यह हो जाता है कि अब पूरा परिवार आपके ऊपर निर्भर रहता है। लोग आपके ऊपर भरोसा करने लगते हैं।
7. आप मुद्रा का महत्व समझ जाते हैं। जहाँ पहले पिता जी के पैसे पानी की तरह बहाते थे अब उन्ही पैसों की कीमत समझ में आने लगती हैं। अब पता चलता है कि मॉल में जाकर 250 रूपए का पिज़्ज़ा खाने के बदले 250 रूपए में हफ्ते भर की सब्ज़ी लायी जा साकती है। इन्वेस्टमेंट (बचत) की तरफ ध्यान केंद्रित हो जाता है। अब सब्ज़ी वाले से वस्तु विनिमय में आप निपुण हो जाते हैं। महीने भर काम करने के बाद मिला वेतन भी उतनी ख़ुशी नहीं देता जितना 22 रूपए की सब्ज़ी में बचाये हुए 2 रूपया देता है।
8. आपमें धैर्य का विकास होता है। जहाँ पिताजी घर में 2 बात सुनाते थे तो आप भी 4 बातें सुना देते थे पर अब बॉस के 10 ताने भी आपको धैर्येता से खड़े रहने से नहीं रोक पाते।
9. जीवन में अनुसाशन और स्थिरता बनी रहती है। पहले घर पर देरी से आना, देर रात तक जागे रहना और दोस्तों के साथ बिना किसी कारण लफंगों की तरह घूमते रहना आपकी पहचान थी परन्तु अब आलम यह आ जाता है की आप हर कार्य समय पर करने लगते हैं क्यूंकि दफ्तर में हर काम समय पर देने की आदत आपके जीवन में भी समा जाती है। स्वस्छता और स्वस्थता में आपका मन लग जाता है। अब दोस्तों के साथ रात को सुनसान सड़क पर घूमने में भी अलग ही आनंद आता है।
10. इंतज़ार करने की ख़ुशी भी एक अलग आनंद दे जाती है। महीने भर, अगले महीने की 1 तारीख का इंतज़ार, छुट्टी के बाद घर जाने का इंतज़ार, अपना जन्मदिन और रविवार जैसी छोटी छोटी ख़ुशी मनाने का इंतज़ार, दफ्तर में प्रमोशन का इंतज़ार और न जाने क्या क्या। समय आपकी परीक्षा लेता है और आप उस परीक्षा को आसानी से उत्तीर्ण करना सीख जाते हैं।
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सीखना सिर्फ ऊपर लिखी कुछ ही बातों पर सीमित नहीं हो सकता। इसके अलावा भी अन्य छोटी छोटी बातें आप प्रतिदिन सीखते रहते हैं।
तो यदि आप भी दफ्तर के कार्येरत हैं या व्यवसाय में संलग्न है तो अपने कुछ सीख हमसे जरूर शेयर करें।
साथ में थोड़ा सा समय निकालकर यह लेख अपने दफ्तर के मित्रों में शेयर करना न भूलें।
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