Holi (The Festival of "Fear") - होली (डर का त्योहार)
होली - बचपन से यही सुनाई दिया कि होली रंगों का त्यौहार है। इस दिन लोग ख़ुशी ख़ुशी एक दूसरे को रंग लगाकर और मिठाई खिलाकर होली की बधाईयां देते हैं। कईं बार यही वाक्य परीक्षा में होली के निबंध लिखते समय लिखा जाने वाला मूल वाक्य होता था।
परन्तु सच्चाई इससे बिलकुल अलग थी।
परन्तु सच्चाई इससे बिलकुल अलग थी।

आजकल होली एक "डर का त्यौहार" बन गया है। अब रंग तो लगाए जाते हैं परन्तु केवल परेशान करने के उद्देश्य से। रंग भी ऐसे ऐसे की इंसान के मुख से अगले 1 हफ्ते तक न उतरे।
यह सब शुरू होता है होली के 2-3 हफ्ते पहले से। अब इंसान की नजर रास्ते पर नहीं अपितु ऊपर की इमारतों पे होती है कि न जाने कहाँ से कौन उस व्यक्ति की सुबह न ख़राब कर दे। सुना था होली सहमति और दो लोगों के स्वीकार के साथ खेला जाता है परन्तु अब आलम यह है की केवल दो क्षण की ख़ुशी के लिए लोग दूसरों का पूरा दिन ख़राब कर जाते हैं। ख़ुशी तो है परन्तु क्षणिक और दूसरे की ख़ुशी को छीनकर पाई हुई।
बचपन में सुना की पहले के जमाने में फूल और केवल प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाती थी परन्तु आज फूल केवल Valentine's Day पर बिकते है और होली में इस्तेमाल होने वाले रंग हानिकारक रसायन से बनाये जाते हैं जो आपकी त्वचा को बहुत नुक्सान पहुँचती है।
कहीं कहीं तो अंडे, नाले का पानी और न जाने क्या क्या इस्तेमाल किया जाता हैं।
पहले होली के दिन लोग घर से बाहर निकला करते थे, कोई रास्ते में मिल जाए तो अनुमति मांगकर, सहमति से, प्यार से रंग लगाया जाता था और बधाइयां दी जाती थी परन्तु यदि अब आप होली के दिन घर से बाहर गए तो सबसे पहले आपके ऊपर 10 गंदे पानी के गुब्बारे पड़ेंगे, फिर अगले चौराहे में कुछ लफंगे नौजवान आपको रंग लगाने की कोशिश करेंगे, यदि आप मान गए तो चेहरे के साथ पूरा शरीर रंग दिया जाता है और यदि मना किया तो सबसे पहले आपको जबरदस्ती पकड़ा जाएगा, फिर आपको तब तक सताया जाएगा जब तक उनका मन न भर जाए।
लड़कियों के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता क्यूंकि आलम यह है की आज तक अपने जीवन के 22 वर्षों के भीतर मैंने कभी भी होली के दिन कन्याओं को घर के बाहर यहां तक की छत पर भी नहीं देखा।

सड़कें सुनसान रहती हैं, गालियां नाले के सामान दिखाई देती हैं, हर व्यक्ति डर के माहौल के साथ छुप छुप कर ही निकलता है।
होली के दिन मदिरा पान करने वाले, जुआ खेलने वाले और मांस खाने वाले लोगों की कमी भी नहीं है। परन्तु आधे से ज्यादा लोगों को यही पता नहीं होता कि आखिर होली मनाई क्यों जाती है।
होली जैसे एक पावन पर्व को इस तरह पाप का खेल बनाते हुए कभी नहीं देखा।
यदि आप इन सं कृत्यों में शामिल नहीं होते और शांतिप्रिय ढंग से होली मनाते हैं तो आपको मेरा कोटी कोटी प्रणाम।
यदि आप किसी को ऊपर लिखे कृत्यों को करते हुए देखते हैं तो एक ना-कामयाब कोशिश अवश्य करें उसको समझाने की क्यूंकि ऐसे व्यक्ति जलेबी की तरह सीधे होते है जिन्हे कभी समझाया नहीं जा सकता। परन्तु अपना कर्त्तव्य अवश्य निभाएं। क्या पता 100 में से 1 ही सुधर जाए।
यही कहना चाहेंगे - होली खेलें परन्तु नियम, क़ानून और मर्यादा में रहकर। कुछ भी करने से पहले यह अवश्य सोच लें आप जो करने जा रहे हैं क्या वो सही है और उससे दूसरे पर क्या प्रभाव पड़ेगा। न जाने क्या पता की आज उसके साथ किया गया वह कृत्या आपके आने वाले बुरे वक्त का एक मोड़ हो।
अंत में, आप सभी को पावन पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं। खुश रहें और खुशियां बाटें।
Aap sahi bol rhe hai ...prr
ReplyDeleteमैं आपके विचारों से सहमत नहीं । यह एक क्षेत्र विशेष की होली को देख कर दिए गए विचार हैं। होली पूरे भारत देश में मनाया जाने वाला त्यौहार है। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप भारत के गांव की होली को देखें वहां की संस्कृति को देखें सभ्यता को समझें तो शायद आपके विचार में इतनी संकीर्णता नहीं होगी।