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Time & Music - समय के साथ बदलती संगीत की दुनिया !

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संगीत !  केवल इस शब्द के नाम उच्चारण से ही मन में कईं ध्वनियाँ खनखनाने लगती है। संगीत के कईं प्रकार हैं। विश्व में हर स्थान में संगीत के अपने अलग धुन, बोल और अर्थ हैं। संगीत भी परिस्थितियों और उम्र के अनुसार अलग अलग प्रकार से सुने जाते हैं। ख़ुशी, गम, उल्लास, प्रेम, देश प्रेम और न जाने क्या क्या। तो चलिए आज बात करते हैं परिस्थितियों और उम्र के अनुसार बदलते संगीत क्रिया को। इस भाग में हम केवल उम्र के अनुसार संगीत के बदलते स्वरुप का विश्लेषण करेंगे। 1. बाल्यवस्था:- (0 - 12 वर्ष का समय) - यह वह समय होता है जब आप केवल धुन को सुनकर थिरकना शुरू करते हैं, अर्थ की समझ नहीं होती। हम संगीत के प्रति प्रतिक्रिया करना पैदा होते ही शुरू करने लगते है जैसे हल्की सी मुस्कान का चेहरे पे आ जाना, आँख बंद करके केवल धुन को सुनना इत्यादि। बच्चे यदि दो बार भी किसी संगीत को सुन लेते हैं तो तोतले अंदाज में उसे गुनगुनाते रहते है। फिर वही गाना रिश्तेदारों के गाने को कहने पर सुनाई देता है। बच्चों को बोल से कोई मतलब नहीं रहता वे तो केवल वो सुनना चाहते हैं जिसमे 2 मिनट के लिए कमर मटकाया जा सके। ऐसा नहीं है की उन्...

Amazing & Strange Facts Part 3 (अजब - गजब खबर Part 3)

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1. एक देश - एक कार्ड - भारत सरकार बैंकिंग, किराया और खरीदारी आदि जैसे सभी कार्यों के लिए एक कॉमन कार्ड बनाने के बारे में सोच रही है जीससे हमे हर जगह अलग अलग कार्ड लेकर जाना पड़ेगा नहीं अपितु एक ही कार्ड से सभी कार्य सरलता पूर्ण किये जा सकते हैं। 2. नैनीताल में "METROPOLE HOTEL" पिछले महीने जल कर खाक हो गया, लेकिन किसी भी मानवीय नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। कई पुस्तकों में लिखी जानकारी के अनुसार, इस होटल में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने अपना हनीमून मनाया था । 3. एयर इंडिया ने अपने ही कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही की जब उन्हें पता चला कि ग्राउंड लेवल के कुछ कर्मचारी कंपनी के स्टॉक से अपने निजी उपयोग के लिए भोजन का सामन चुरा रहे थे। 4. करीना कपूर ने अपनी पहली फिल्म की सफलता के बाद एक चैट शो में खुलासा किया कि वो उस समय राहुल गांधी को डेट करना चाहती थीं। 5. भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती समस्याओं के कारण महेंद्र सिंह (राजस्थान के निवासी) का विवाह समारोह रद्द कर दिया गया क्योंकि लड़की पाकिस्तान की थी और बरात पाकिस्तान जानी थी। शादी की सारी...

Holi (The Festival of "Fear") - होली (डर का त्योहार)

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होली - बचपन से यही सुनाई दिया कि होली रंगों का त्यौहार है। इस दिन लोग ख़ुशी ख़ुशी एक दूसरे को रंग लगाकर और मिठाई खिलाकर होली की बधाईयां देते हैं। कईं बार यही वाक्य परीक्षा में होली के निबंध लिखते समय लिखा जाने वाला मूल वाक्य होता था। परन्तु सच्चाई इससे बिलकुल अलग थी। आजकल होली एक "डर का त्यौहार" बन गया है। अब रंग तो लगाए जाते हैं परन्तु केवल परेशान करने के उद्देश्य से। रंग भी ऐसे ऐसे की इंसान के मुख से अगले 1 हफ्ते तक न उतरे। यह सब शुरू होता है होली के 2-3 हफ्ते पहले से। अब इंसान की नजर रास्ते पर नहीं अपितु ऊपर की इमारतों पे होती है कि न जाने कहाँ से कौन उस व्यक्ति की सुबह न ख़राब कर दे। सुना था होली सहमति और दो लोगों के स्वीकार के साथ खेला जाता है परन्तु अब आलम यह है की केवल दो क्षण की ख़ुशी के लिए लोग दूसरों का पूरा दिन ख़राब कर जाते हैं। ख़ुशी तो है परन्तु क्षणिक और दूसरे की ख़ुशी को छीनकर पाई हुई। बचपन में सुना की पहले के जमाने में फूल और केवल प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाती थी परन्तु आज फूल केवल Valentine's Day पर बिकते है और होली में इस्तेमाल होने वाले रंग हानिकारक रसा...

Amazing & Strange Facts Part 2 (अजब - गजब खबर Part 2)

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1. डायसन कंपनी ने "डायसन प्योर - हॉट एंड कूल" नाम से एक नया एयर प्यूरीफायर पेश किया है जो एक साधारण एयर प्यूरीफायर की तुलना में 3 चीजें कर सकता है। यह हवा को शुद्ध कर सकता है और इसके साथ ही आपकी जरूरत के अनुसार कमरे को ठंडा या गर्म भी कर सकता है। इस प्यूरीफायर की कीमत 52,900 / - रूपए है, जिसे आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से खरीद सकते हैं।  2. इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक प्रेमी जोड़ा हैदराबाद मेट्रो स्टेशन के एक मेट्रो लिफ्ट में चुंबन कर रहा था। वीडियो लिफ्ट की सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से रिकॉर्ड की गयी थी। 3. “गुरुद्वारा बंगला साहिब” के नीचे एक विशाल दान पेटी है जिसमें दान और अन्य धनराशि आती है। गुरुद्वारे में चढ़ाई गयी धनराशि सीधा इस कमरे में जाकर गिरती है। रकम इतनी बड़ी होती है कि पैसे गिनने के लिए सप्ताह में दो बार इस कमरे को खोला जाता है। यह कमरा आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं के साथ अत्यधिक संरक्षित और सुरक्षित है। 4. हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में, एक डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान एक महिला के पेट के अंदर चाकू छोड़ दिया। उस समय महिला को यह पता नहीं चला...

Amazing & Strange Facts Part 1 (अजब - गजब खबर Part 1)

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1. नई दिल्ली - पिछले 5 वर्षों के दौरान, भारत के प्रधानमंत्री को कई लोगों, संगठनों और संस्थाओं से कईं उपहार मिले। पिछले महीने (जनवरी 2019 में) इन उपहारों की नई दिल्ली में अलग-अलग कीमतों में नीलामी की गई थी। इनमे से एक लकड़ी की बाइक 5,00,000 / - में बिकी थी। 2. पंजाब - लोग अक्सर कुछ ऐसा करते हैं जो सामान्य लोगों के लिए कल्पना से परे होती हैं। एक ऐसा ही वाकिया पंजाब में हुआ। एक महिला ने अपने भाई को अपने पति के रूप में पंजीकृत किया (केवल कानूनी कागजात में, वास्तव में नहीं) केवल ऑस्ट्रेलिया का निवासी वीजा प्राप्त करने के लिए क्योंकि उसका भाई पहले से ही ऑस्ट्रेलिया का निवासी है। इस कृत्य में पूरा परिवार शामिल था। 3. भारत - "ईशा अंबानी और आकाश अंबानी, मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के बच्चे आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबीज़) की मदद से पैदा हुए थे" - इस रहस्य का खुलासा ईशा अंबानी ने एक प्रसिद्ध पत्रिका के साक्षात्कार के दौरान किया। मुकेश और नीता अंबानी की शादी के 7 साल बाद दोनों का जन्म हुआ था। 4. महाराष्ट्र - महाराष्ट्र के एक स्कूल में मिड-डे-मील में सांप पाया गया। सांप "खिचड़...

Beautiful Story of Attraction - नेत्रों का प्रेम जाल !

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मैंने कभी मदिरापान तो नहीं किया पर पता नहीं उसकी आँखों में ऐसा क्या छुपा था ! मैंने कभी सोचा नहीं शीतपहर की वो सामान्य प्रातः इतनी ऊर्जामय होगी। सदैव की तरह दफ्तर का समय हुआ था। घर से निकला। घर में किसी बात से खफा था और जाते समय सड़क की वो पथरीली जमीन मेरे आतंरिक क्रोध की परीक्षा ले रही थी। ऊपर से वाहन का समय पर न आना, समय पर दफ्तर न पहुंच पाने की चिंता को उर्जित किये जा रहा था। ईश्वर की कृपा से वाहन का आगमन समय पर हुआ। सीट भी मिल गयी। जैसे ही अपने स्थान में मैंने आसन ग्रहण किया वैसे ही मैंने संगीत यन्त्र निकलकर अपने कानों में संगीत की मधुर ध्वनि से अपनी चिंताओं और क्रोध को शांत करने का प्रयत्न किया। फिर वो घटना घटित हुई जिसके रोज घटित होने का आज तक मुझे सदैव इंतजार रहता है। एक ऐसी भावना ने ह्रदय में घर किया जो अपूर्व थी। उस सुन्दर काया की एक झलक मेरे उस क्रोध और चिंता को ऐसे निगल कर शांति प्रदान कर गयी जिस तरह समुद्र मंथन में निकला विष भोलेशंकर ने निगल कर देवताओं को शांति प्रदान की थी। कान में संगीत के बोल निःशब्द पद गए। सडकों से निकली वाहनों की ध्वनि सुनाई नहीं दे रही थी।...

Problem to Being an Older Brother - बड़े भाई की व्यथा !

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(चेतावनी - दिल दहला देने वाले तथ्यों का अनावरण अत्यंत मर्मभेदी शब्दों के द्वारा किया जा रहा है यहां पर, कृपया बड़े भाई लोग अपनी भावनाओं पर संयम रखकर आगे पढ़ना शुरू करें)  बड़ा भाई ! कहते हैं यह वो प्राणी है जिसे पिता का दायां हाथ माना जाता है। कहने को तो यह बड़ा है परन्तु इससे ज्यादा बेबस घर में कोई नहीं होता। आज आपको बताने जा रहें हैं ऐसे ऐसे किस्से और घटनाएं जिससे हर बड़े भाई को होकर गुजरना पड़ता है। 1. यह शख्स तब तक तक निगाह में रहता है जब तक घर में छोटा भाई या बहन नहीं आ जाते। उसके बाद इसका वो हाल होता है जैसे एक स्मार्टफोन में Calling की सुविधा का हो जाता है जिसका महत्व तो बहुत है पर सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही इसकी याद आती है। (पर अपना टाइम आएगा .......................................... घंटा आएगा ! 2. जिम्मेदारी के नाम पर घर का सारा काम इसी से करवाया जाता है। सब्ज़ी लेकर आना, आटा लाना, रोते भाई को शांत करवाना। शुरू शुरू में तो वो भी यह सोचकर करता है की लोग उसकी इज्जत और उसके काम की सराहना कर रहे हैं पर बाद में पता चलता है की वो केवल एक नौकर बन कर रह जाता है। छोटा भाई कुछ करेगा...

Had Someone Heard This - क्या किसी ने यह सुना है !

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1. 11वीं में Commerce (वाणिज्य) विषय लेने के बाद दोस्तों से "अब तो CA बनेगा" कहते हुए नहीं सुना तो क्या सुना ! (C.P.T. के 2 Attempts देने के बाद की सच्चाई - अपुन नहीं बचेगा इधर, मर जाएगा अपुन) 2. सब्ज़ी लेकर आने के बाद माँ से "धनिया लाया की नहीं" कहते हुए नहीं सुना तो क्या सुना ! (सच्चाई - सब्ज़ी की बजाये आटा ले आया, धनिया तो दूर की बात है) 3. दिल्ली वाले - यह घटिया सामन तूने 1,500 का लिया, अगर तू मुझे बोलता न तो मैं 150 दे दिला देता ! (सच्चाई - जब दिल्ली वाला वही चीज 2,000 की खरीद के पहनता है) 4. बच्चे - विज्ञान में रूचि पैदा होने पर - मैं तो पक्का डॉक्टर ही बनूँगा। गणित में रूचि होने पर - मैं तो गणितज्ञ ही बनूँगा। समाजिक विज्ञान में रूचि होने पर - मैं तो अध्यापक ही बनूँगा। (सच्चाई - चू*या बन जाते हैं।)  5. परीक्षा हॉल में पीछे वाला - भाई, दिखा दे, सिर्फ 1 आंसर ही देखूंगा । (सच्चाई - जब तुम्हारे परीक्षा पत्र की फोटोकॉपी नक़ल उस लड़के की परीक्षा पत्र से मिलती है)। 6. एक दोस्त दूसरे दोस्त से - भाई सिर्फ ...

The Game of Religion - धार्मिक क्रीड़ा !

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धर्म - एक ऐसा विषय जिसके बारे में हम कम ही बात करते हैं परंतु अपने दैनिक जीवन मे ऐसे कईं वाकिये और घटनाएं घटित होती हैं जो आपको धर्म के ऊपर लिखने में मजबूर करती हैं। इस लेख का उद्देश्य किसी धर्म को ऊपर उठाना, धर्म की अवहेलना करना, धर्म का प्रचार, किसी के मन को आहत करना और किसी धार्मिक क्रिया को छोटा दिखाना नहीं है। इसमें केवल हमने अपने विचार व्यक्त किये हैं। हो सकता है इनमे से कईं बातों पर आप सहमत हों और कईं बातों पर नहीं, परन्तु इस लेख से यदि किसी को कुछ सीख मिल जाये हो हमारे लिखने का उद्देश्य पूर्ण हो जाए। आज कुछ ऐसी ही घटनाओं का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि क्या ऐसा करना या ऐसे कृत्य सही हैं। 1. आज सुबह एक महिला दिखीं जो नंगे पांव घर से मंदिर जा रहीं थीं। सुबह सुबह इतनी ठंड, खाली पैर और सड़क की मिट्टी से भरपूर जमीन। मंदिर भी पास नही बल्कि लगभग 2 KM का सफर।  उनके लिए यह शायद आस्था का विषय था परंतु कभी इसके नकारात्मक प्रभाव की तरफ किसी का ध्यान नही जाता। 4℃ की इतनी सुबह में घर से निकलना ही घातक है। ऊपर से नंगे पांव। सड़क का गंदा पानी, रेत, जानवरों का मल और न जाने क्या क्या उन पै...

Knowledge you Gain from Office Life - दफ्तर की सीख !

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वैसे तो दफ्तर में हम अपने कार्य से सम्बंधित कईं बातें रोज सीखते रहते हैं परन्तु उसके अलावा ऐसी कईं चीजें हैं जो हम सीखते हैं। चलिए आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे तथ्य जो आप दफ्तर में कार्य के अलावा सीखते हैं। 1. सबसे पहले आप सीखते हो कि तरह तरह से लोगों से मेल मिलाप और वार्तालाप कैसे किया जाता है। जब आप पढ़ रहे होते हैं तो आपकी मुलकात केवल पढाई से सम्बंधित व्यक्तियों से ही होती है परन्तु दफ्तर में आपको कईं क्षेत्रों से सम्बंधित लोग मिलते हैं। हर व्यक्ति से अलग तरह की बातें और अलग व्यवहार आपको विविधता में संचार करने में सहायक सिद्ध होती है। 2. अब आपकी ऐसे लोगों से मुलाकात होगी जिनसे यदि आपकी पहचान अच्छी हो जाए वो व्यक्ति आपके जीवन के कईं पहलुओं में काम आएगा। दफ्तर में आया हर व्यक्ति अलग अलग क्षेत्र में निपुण होता है। कोई व्यापर में, कोई संचार के क्षेत्र में, और न जाने कहाँ कहाँ। यदि आप सभी व्यक्तियों से अच्छे सम्बन्ध बरकरार रखते हैं तो वो व्यक्ति किसी न किसी रूप में आपके जीवन के कईं मुश्किल क्षेत्र में सहायक सिद्ध होगा। 3. आपके नए मित्र बनते हैं। ऐसे मित्र जो...

Why Someone Writes - कोई क्यों लिखता है !

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क्या आपने कभी सोचा है की कोई व्यक्ति क्यों लिखता है?  उसे क्या जरूरत है अपनी बातों और अपने विचारों को दूसरों के समक्ष रखने की जबकि वो आसानी से किसी को भी मौखिक रूप में वो बात बता सकता है। आज यही बात जानेंगे कि किसी व्यक्ति के लिखने के पीछे क्या क्या कारण होते हैं। कुछ कारण मेरे भी होंगे और कुछ ऐसे भी होंगे जो दूसरों से जुड़े होंगे। 1. लेखन से प्रेम:- मेरे जैसे व्यक्ति लिखते हैं क्यूंकि उन्हें लिखना अच्छा लगता है। ऐसे व्यक्ति यह नहीं सोचते की मेरे लिखने से मेरा फायदा होगा या नुकसान, यह तो बस इसलिए लिखते हैं क्यूंकि लेखन ने इनके जीवन में एक गहरी छाप छोड़ी है। भूतकाल में हुए लेखन से जुड़े ऐसे कई वाकिये इनको लेखन की तरफ आकर्षित करते हैं। 2. पेट की भूख:- यह वो व्यक्ति होते हैं जिन्होंने लेखन को केवल व्यापर के नजरिये से देखा है। यह लेखन प्रेम को रोजगार के रूप में परिवर्तित करते हैं। इनके लिए लेखन प्रेम के साथ साथ रोजगार का एक साधन भी है। यह हर लेख में अपना लाभ खोजते हैं। इनका मूल उद्देश्य केवल लेखन नहीं अपितु लाभ लेखन है। 3. संचार का साधन:- कुछ इसलिए लिखते हैं ताकि वो अपनी बातों को दू...

Situation in the Time of election चुनावी झोल !

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जिस कार्य को आपने किया ही नहीं, जब आपने अपनी जिम्मेदारियों को निभाया ही नहीं और उसके लिए आप एक उज्जवल और सुखद जीत या उत्तम फल की उम्मीद करते हो तो आपसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं है! हमारी राजनैतिक पार्टियां भी कुछ ऐसी ही हैं। चलिए पूरी प्रक्रिया को जानते हैं। चुनाव के समय ऐसे प्रचार करेंगी जैसे बीते 5 वर्षों में उन्होंने पता नहीं कौन से तीर मार लिए। विपक्ष का तो रहने दीजिये, वो बस पांच वर्ष इंतज़ार करती हैं कि अगली बार हम सत्ता में आएंगे। सच्चाई यह भी है कि वो सत्ता में आ भी जाती है। ऐसा कैसे होता है ! कारण हैं :- सत्ताधारी पार्टी की विफलता और हमारे अंदर घोले गए विष ! पूरे वर्ष विपक्ष कुछ कार्य करने की बजाये सत्ताधारी पार्टी की बुराईयां करती रहती है। खुद तो कुछ करना होता नहीं इसलिए सत्ताधारी पार्टी के कार्यों में अड़चन डालती हैं। उनके यह प्रयास सफल हो जाते हैं क्यूंकि 5 वर्ष विपक्ष द्वारा सत्ताधारी पार्टी की बुराईयां सुन-सुनकर हमे लगने लगता है की अब यह पार्टी काम की नहीं रही इसलिए अगले वर्ष विपक्ष को वोट दे देते हैं। अब यह सिलसिला पंच वर्षीय योजना की तरह बदलती रहती है एक चक्र की तरह। अगले वर्ष...

देशभक्ति, राजनीति एवं हिन्दुत्व रुपी त्रिकोण !

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वक्त के साथ लोगों की सोच और दूसरों के प्रति भावनाओं को बदलते हुए देखा है परन्तु कभी भी नकारात्मक भावना को सकारात्मक में परिवर्तित होते नहीं देखा बल्कि सत्यता इसके विपरीत ही मालूम पड़ती है।  एक समय था जब हमारे परम पूजनीय राष्ट्रपिता श्री मोहनदास करमचंद गाँधी जी का सम्मान राह में पड़ा वो एक सूक्ष्म कण भी करता था जो भारत की स्वतंत्रता की राह का साक्षी था। कईं व्यक्तियों ने उनके कार्य को सराहा था, शत्रु भी उनके व्यक्तित्व से प्प्रभावित हो जाते थे, उनकी राह का हर फूल उनके पगों के स्पर्श को अपना सौभाग्य मानता था। और आज उसी महान व्यक्तित्व की महानता पर प्रश्न चिह्न उठ खड़ा है ! आज किसी का भेजा हुआ नथूराम गोडसे का यह लेख पढ़ा।  मैं नहीं जानता इस लेख में कितनी सच्चाई है परन्तु यह अवश्य ज्ञात है की इसमें जो लिखा उसमे आधा असत्य है। आजकल हर व्यक्ति अपने विचारों को किसी स्वतंत्रता सेनानी की छवि के साथ लिख देता है। यह राजनीति का एक और खेला है। इससे लोग लिखी हुई बातों को सत्य मान कर आत्मसाथ कर लेते हैं क्यूंकि हम अपने स्वंत्रता सेनानी का सम्मान करते हैं और राजनीतिज्ञ उसी सम्मान का फायदा उठ...

The Combination of Greed and Religion - धर्म और लालच का संगम !

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कल तक जहां मासूम जानवरों की निर्ममता से हत्या करके उनका मांस बड़े शान से बेचा जाता था आज वहीँ पर, उसी दूकान के समक्ष माता की मूर्ति लगाईं गई है। धर्म के नाम पर व्यापर किया जा रहा है। राम - रहीम के नाम पर सिसयासत हो रही है। केवल धर्म के नाम पर एक दूसरे का नरसंहार किया जा रहा है। मानव धर्म के सामने इंसानियत का क़त्ल कर रहा है। मानवता कलंकित हुई जा रही है। कभी ईश्वर ने यह अनुमान लगाया ही नहीं होगा की एक दिन ऐसा आएगा जब उसी का मंदिर बनाने के लिए इंसान एक दूसरे का क़त्ल करेगा। घर में पत्थर की माता की मूर्ती को सालों तक सजाया जाता है, पूजा की जाती है, उस कमरे के खाली पाँव जाय जाता है, भोग लगाए जाते है परन्तु उसी घर में कन्या की जन्म से पहले ही हत्या कर दी जाती है।  धर्म से पुण्य कमाने को व्यक्ति तीर्थ जाता है परन्तु यह कभी समझ नहीं पाता की जिस तीर्थ का फल माता ने बेटी के रूप में घर में भेजा था उसे जन्म से पहले ही माता को सौप दिया गया है। पूरे वर्ष घर की हालत कूड़ेदान से कम नहीं होती पर दिवाली आने के 2 हफ्ते पहले से ही केवल माता को प्रसन्न करने के लिए, धन की लालच सफाई करने में ...

Yoga - The Art of Living and Science - योग - जीवन जीने की कला और विज्ञान !

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योग - जीवन जीने की कला और विज्ञान!  योग!  सिर्फ एक शब्द नहीं अपितु एक मार्ग है स्वयं को स्वस्थ रखने और परमात्मा से स्वयं को जोड़ने का। बचपन में अध्यापक विद्यालय में कहते थे-योग का अर्थ है आत्मा को परमात्मा से जोड़ना परन्तु उस समय इसका अर्थ कदापि समझ नहीं आया परन्तु इसे आजमाने और इसे स्वयं में ढालने के पश्चात अब इसका अर्थ समझ आया। परन्तु अब इसके अर्थ में एक और सूत्र जुड़ गया और वो है:- योग-जीवन जीने की कला और विज्ञान! फिर से आज कईं लोग असमंजस में हैं कि आखिर "योग - जीवन जीने की कला और विज्ञान" कैसे है ? चलिए जानते हैं कैसे ! परन्तु आगे बढ़ने से पहले आपको यह समझना होगा की इसका अर्थ आपको तभी समझ आएगा यदि आप इसे अपने जीवन में अपनाएंगे। केवल पुस्तक में पढ़े अनुसार सिर्फ समझने से कुछ नहीं होगा बल्कि इसे अपने निजी जीवन में आजमाना अत्यंत आवश्यक है। योग-जीवन की कला!  हम सब दिन प्रतिदिन अनेक कार्यों में संलग्न होते हैं। हर व्यक्ति किसी न किसी कार्य/कला में माहिर होता है। कोई अच्छा डॉक्टर होता है तो कोई अच्छा इंजीनियर। उसी प्रकार योग भी जीवन की एक कला है। जिस प्रकार हम अपने ...

India's Foreign Policy - भारत की विदेश निति !

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शब्द थोड़े कम हैं पर विचारों में कमी नहीं. कभी कभी एक छोटी सी चोट भी गहरा छाप छोड़ जाती है। इसी के साथ मैं "विदेशी नीति हमारे विकास के लिए एक साधन" विषय पर अपनी राय रखता हूँ। पहले इसका अर्थ समझ लेते हैं - एक देश की विदेश नीति, जिसे विदेशी संबंध या विदेशी मामलों की नीति भी कहा जाता है राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने, अपने अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाये रखने, विदेशी स्तर पर लक्ष्य हासिल करने और देश के विकास के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने से सम्बंधित हैं। इसका मुख्या लक्ष्य दूसरे देशों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने और देश के विकास में सहायता प्राप्त करने व सहायता प्रदान करने से है। भारत की विदेश निति उभरते भारत के लिए एक नयी सौगात है। जिस तरह भारत के प्रधानमन्त्री विदेशी देशों के साथ सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे अभी ली गयी विदेशी नीतियों का फल भारत को विकसित देश के रूप में मिलेगा। 1947 के बाद विदेशी नीतियों की असफलता के बाद माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी से शुरूआती दिनों में ही कईं देशों के साथ विदेशी नीतियों और विदेशी सम्बन्ध को बनाये ...

Some Changes Required in Schools - यह बदलाव जरूरी हैं!

आजकल के हालात को देखते हुए यह मेरे कुछ विचार है विद्यालय में कुछ बदलाव के बारे में, जिनसे मैं मानता हूँ कि बदलाव आ सकता है यदि इन उपायों को सही रूप से लागू किया जाए। 1. वातावरण - सर्वप्रथम, विद्यालय के वातावरण को बदलना होगा। एक अभिभावक सबसे पहले विद्यालय का वातावरण, रूप और सुंदरता देखता है तभी अगले आयाम तक पहुचता है, यदि उन्हें वातावरण ही अच्छा न लगे तो आगे की बात ही नही बढ़ती। अतः इसके लिए समय समय पर विद्यालय की मरम्मत, राग रोगन, सफाई, दीवारों में शैक्षिक विचारों व चित्रों का प्रदर्शन जैसे कार्यों को पूरा कर लेना चाहिए। विद्यालय सुंदर होगा तो बच्चों का भी पढ़ने में मन लगा रहेगा। 2. नैतिक शिक्षा - विद्यालय में पाठ्यपुस्तक के ज्ञान के अलावा दैनिक जीवन से जुड़ी शिक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए। जैसे  दैनिक जीवन की परेशानियों का निपटान कैसे किया जाए, परेशानी के समय कैसे उस समस्या का समाधान किया जाए इत्यादि। इससे यह फायदा होगा कि  विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के ज्ञान के आधार पर नैतिक शिक्षा को जीवन मे अपनाकर जीवन की परेशानियों का सामना आसानी से कर सकते हैं।   3. प...